अन्वयः
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शम-एक-वृत्तेः भवतः आत्मनीनं विध्वंसनं छलेन विधाय, ते विद्विषः प्रकाशित-त्वत्-मति-शील-साराः (सन्तः) कृत-उपकाराः इव (सन्ति) ।
English Summary
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By deceitfully causing the ruin of you, whose sole pursuit was tranquility, your enemies have, in fact, acted like benefactors, as they have brought to light the excellence of your intellect and character.
सारांश
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शान्तिप्रिय आपका छल से विनाश करने का प्रयास करके शत्रुओं ने अनजाने में ही आपकी बुद्धि और शील की श्रेष्ठता को संसार के सामने प्रकट कर दिया है, इस प्रकार उन्होंने आपका उपकार ही किया है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
विधायेति ॥ किं च शम एवैका मुख्या वृत्तिर्यस्य तस्यापरॊपतापिनो भवतश्छलेन कपटेन । आत्मने हित आत्मनीनः । स न भवतीत्यनात्मनीनः । स्वस्यैवानर्थहेतुरित्यर्थः । तम्।
आत्मन्विश्वजनभोगोत्तरपदात्खः इति खप्रत्ययः । विध्वंसमपकारं विधाय कृत्वा । प्रकाशितः प्रख्यापितस्वन्मतिशीलयोस्तव प्रज्ञासद्वृत्तयोः सारः प्रकर्षो यैस्ते तथोक्ताः। ते तव विद्विषः कृतोपकारा इवोपकृतवन्त इव । अपकारोऽप्युपकारायैव संवृत्तः ।यदेषां दौर्जन्यं युष्मत्सौजन्यं च जगति सुव्यक्तमासीदित्यर्थः । विद्यमानस्यापि सुजनस्य चन्दनदारुण इव गुणाः परिभव एव प्रचुरीभवन्तीति भावः ॥ अथ प्रयोजनान्तरमाह
पदच्छेदः
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| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having caused |
| विध्वंसनम् | विध्वंसन (वि√ध्वंस्+ल्युट्, २.१) | ruin |
| आत्मनीनं | आत्मनीन (२.१) | your own |
| शमैकवृत्तेः | शम–एक–वृत्ति (६.१) | of you whose sole occupation is tranquility |
| भवतः | भवत् (६.१) | your |
| छलेन | छल (३.१) | by deceit |
| प्रकाशितत्वन्मतिशीलसाराः | प्रकाशित–त्वद्–मति–शील–सार (१.३) | they by whom the excellence of your intellect and character has been revealed |
| कृतोपकाराः | कृत–उपकार (१.३) | those who have done a favor |
| इव | इव | like |
| विद्विषः | विद्विष् (१.३) | your enemies |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | धा | य | वि | ध्वं | स | न | मा | त्म | नी | नं |
| श | मै | क | वृ | त्ते | र्भ | व | त | श्छ | ले | न |
| प्र | का | शि | त | त्व | न्म | ति | शी | ल | सा | राः |
| कृ | तो | प | का | रा | इ | व | वि | द्वि | ष | स्ते |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||
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