अन्वयः
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भूतिम् इच्छता सुमेधसा (जनेन) द्विषताम् गुरुः उदयः न सुमर्षणः (भवति) । फलसम्पत्प्रवणः महान् अपि परिक्षयः अस्वन्ततरः (भवति) ।
English Summary
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For a wise person seeking prosperity, the significant rise of enemies is unbearable. However, even a great loss is considered less calamitous if it ultimately leads to fruitful success.
सारांश
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बुद्धिमान व्यक्ति शत्रुओं की ऐसी उन्नति सहन कर लेते हैं जिसमें उनके विनाश के बीज हों, किंतु अपनी ऐसी अवनति कभी नहीं चाहते जो भविष्य के विनाश का कारण बने।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
द्विषतामिति ॥ भूतिमुदयभिच्छता । शोभना मेधा यस्य तेन सुमेधसा सुधिया ।
नित्यमसिच्प्रजामेधयोः इत्यसिच्प्रत्ययः । गुरुर्महानप्यस्वन्ततरोऽत्यन्तदुरन्तः । क्षयोन्मुखं इत्यर्थः । द्विषतामुदयो वृद्धिः । सुखेन मृष्यत इति सुमर्षणः सुसहः । उपेक्ष्य इत्यर्थः । स्वन्तश्चेद्दुर्मर्षण इति भावः । ‘भाषायां शासि-इत्यादिना खलर्थे युच्प्रत्ययः । महानपि फलसंपत्प्रवणः फलसंपदुन्मुखः। ‘प्रनिरन्तर— इत्यादिना णत्वम् । परिक्षयो न सुमर्षणः । नोपेक्ष्य इत्यर्थः । अन्यथा तूपेक्ष्य इति भावः । नह्युदय एव प्रतीकार्यो न च क्षय इत्येवोपेक्ष्यः। किंतु स्वत्तत्वास्वन्तत्वाभ्यामुभावपि प्रतीकार्यावुपेक्ष्यौ च भवत इत्यर्थः । , अथोभयोरपि मध्य एकतरस्योदयक्षययोर्गतिमुक्त्वेदानीं युगपत्परिक्षयागमे गतिमाह
पदच्छेदः
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| द्विषताम् | द्विषत् (६.३) | of enemies |
| उदयः | उदय (१.१) | the rise |
| सुमेधसा | सुमेधस् (३.१) | by a wise person |
| गुरुः | गुरु (१.१) | great |
| अस्वन्ततरः | अस्वन्ततर (१.१) | less calamitous |
| सुमर्षणः | सुमर्षण (१.१) | bearable |
| न | न | not |
| महान् | महत् (१.१) | great |
| अपि | अपि | even |
| भूतिम् | भूति (२.१) | prosperity |
| इच्छता | इच्छत् (√इष्+शतृ, ३.१) | by one desiring |
| फलसम्पत्प्रवणः | फल–सम्पद्–प्रवण (१.१) | leading to fruitful success |
| परिक्षयः | परिक्षय (१.१) | decline |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द्वि | ष | ता | मु | द | यः | सु | मे | ध | सा | |
| गु | रु | र | स्व | न्त | त | रः | सु | म | र्ष | णः |
| न | म | हा | न | पि | भू | ति | मि | च्छ | ता | |
| फ | ल | स | म्प | त्प्र | व | णः | प | रि | क्ष | यः |
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