अन्वयः
AI
हे नृप, ते विवेकिनी मतिः चतसृषु अपि विद्यासु निरूढिम् आगता । (सा) कथं विपर्ययम् एत्य पङ्कम् करिणी इव अवसीदति?
English Summary
AI
O king, your discerning intellect, which has attained mastery in all four sciences, how has it now reached a state of confusion and sinks, like a female elephant stuck in mud?
सारांश
AI
हे राजन! चारों विद्याओं में पारंगत आपकी विवेकी बुद्धि आज विपरीत दिशा में जाकर मोहग्रस्त कैसे हो रही है, जैसे कोई हथिनी कीचड़ में धंस जाती है?
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
चतसृष्विति ॥ हे नृप, चतसृष्वपि विद्यास्वान्वीक्षिक्यादिषु ।
आन्वीक्षिकी त्रयी वार्ता दण्डनीतिश्च शाश्वती। विद्याश्चैताश्चतस्रस्तु लोकसंस्थितिहेतवः ॥ इति कामन्दक: निरूढिमागता प्रसिद्धिं गता। अतएव विवेकिनी सदसद्विवेकवती । यथाह मनुः—‘आन्वीक्षिक्यां तु विज्ञानं धर्माधर्मौ त्रयीस्थितौ । अर्थानर्थौ तु वार्तायां दण्डनीत्यां नयानयौ ॥ इति । ते मतिः कथं करिणी पङ्कमिव विपर्ययं वैपरीत्यमविवेकरूपमेत्यावसीदति नश्यति । तन्न युक्तमिति भावः ॥ किं नश्छिन्नमिदानीं येनेत्थमुपालभ्येमहीत्यत्राह—विधुरं किमतःपरं परैरवगीतां गमिते दशामिमाम् । अवसीदति यत्सुरैरपि त्वयि संभावितवृत्ति पौरुषम्
पदच्छेदः
AI
| चतसृषु | चतुर् (७.३) | in the four |
| अपि | अपि | even |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| विवेकिनी | विवेकिन् (१.१) | discerning |
| नृप | नृप (८.१) | O king |
| विद्यासु | विद्या (७.३) | in the sciences |
| निरूढिम् | निरूढि (२.१) | mastery |
| आगता | आगत (आ√गम्+क्त, १.१) | has attained |
| कथम् | कथम् | how |
| एत्य | एत्य (आ√इ+ल्यप्) | having reached |
| मतिः | मति (१.१) | intellect |
| विपर्ययम् | विपर्यय (२.१) | confusion |
| करिणी | करिन् (१.१) | a female elephant |
| पङ्कम् | पङ्क (२.१) | mud |
| इव | इव | like |
| अवसीदति | अवसीदति (अव√सद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | sinks |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| च | त | सृ | ष्व | पि | ते | वि | वे | कि | नी | |
| नृ | प | वि | द्या | सु | नि | रू | ढि | मा | ग | ता |
| क | थ | मे | त्य | म | ति | र्वि | प | र्य | यं | |
| क | रि | णी | प | ङ्क | मि | वा | व | सी | द | ति |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.