अन्वयः
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अतिपातित-काल-साधना, स्व-शरीर-इन्द्रिय-वर्ग-तापनी अक्षमा जनवत् भवन्तम् नय-सिद्धेः अपनेतुम् न अर्हति ।
English Summary
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Impatience, which causes the means of success to be lost by letting the right time pass and which torments one's own body and senses, should not be able to lead you away from the path of political success, as it does with common people.
सारांश
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समय का दुरुपयोग करने वाली और शरीर एवं इन्द्रियों को कष्ट देने वाली अधीरता आपको नीति-सिद्धि के मार्ग से विचलित न करे, जैसा कि किसी साधारण मनुष्य के साथ होता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अतिपातितेति ॥ अतिपातितान्यतिक्रान्तानि कालः समयोऽनुरूपः साधनानि सहयादीनि यया सा तथोक्ता । तापयतीति तापनी । कर्तरि ल्युट् । टित्वान्ङीप् । स्वस्य यच्छरीरमिन्द्रियवर्गश्च तयोस्तापन्यक्षमा क्रोधो भवन्तं जनवत्पृथग्जनमिव।
तेन तुल्यं- (अष्टाध्यायी ५.१.११५ ) इति वतिप्रत्ययः । तेनेवार्थों लक्ष्यते । तद्धितश्चासर्वविभक्तिः (अष्टाध्यायी १.१.३८ ) इत्यव्ययम् । नयसिद्धेर्नयसाध्यफलादपनेतुं पृथक्कर्तुं नार्हति। असमयक्रोधस्यात्मसंतापातिरिक्तं फलं नास्तीत्यर्थः ॥ दुष्टः क्रोध इत्युक्तम् । अथ क्षमाया गुणानाह
पदच्छेदः
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| अतिपातितकालसाधना | अतिपातित (अति√पत्+णिच्+क्त)–काल–साधन (१.१) | which causes the means of success to be lost by letting the right time pass |
| स्वशरीरेन्द्रियवर्गतापनी | स्व–शरीर–इन्द्रिय–वर्ग–तापनी (√तप्+णिनि+ङीप्, १.१) | which torments one's own body and senses |
| जनवत् | जनवत् | like common people |
| न | न | not |
| भवन्तम् | भवत् (२.१) | you |
| अक्षमा | अक्षमा (१.१) | impatience |
| नयसिद्धेः | नय–सिद्धि (५.१) | from the path of political success |
| अपनेतुम् | अपनेतुम् (अप√नी+तुमुन्) | to lead away |
| अर्हति | अर्हति (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ति | पा | ति | त | का | ल | सा | ध | ना | |
| स्व | श | री | रे | न्द्रि | य | व | र्ग | ता | प | नी |
| ज | न | व | न्न | भ | व | न्त | म | क्ष | मा | |
| न | य | सि | द्धे | र | प | ने | तु | म | र्ह | ति |
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