अन्वयः
AI
(हे वत्स) अपवर्जितविप्लवे, शुचौ, हृदयग्राहिणि, मङ्गलास्पदे गिरां विस्तरे तव विमला मतिः आदर्शे इव अभिदृश्यते ।
English Summary
AI
In this extensive discourse of yours—which is free from confusion, pure, heart-captivating, and an abode of auspiciousness—your own clear intellect is reflected as if in a mirror.
सारांश
AI
दोषरहित, हृदय को छूने वाली और कल्याणकारी तुम्हारी इस विस्तृत वाणी में तुम्हारी निर्मल बुद्धि उसी प्रकार स्पष्ट दिखाई दे रही है जैसे दर्पण में कोई वस्तु साफ दिखती है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अपवर्जितेति ॥ विप्लवः प्रमाणबाधः। अन्यत्र बाह्यमलसंक्रमः । सोऽपवर्जितो यस्य तस्मिन्नपवर्जितविप्लवे। शुचौ। सौशब्द्यं लोहशुद्धिश्च शुचित्वम् । तद्वतीत्यर्थः । अतएव हृदयग्राहिणि मनोरमै मङ्गलास्पदे । एकत्र हितार्थप्रतिपादकत्वादन्यत्र मङ्गलवस्तुत्वाच्च श्रेयस्करे।
रोचनं चन्दनं हेम मृदङ्गं दर्पणं मणिम् । गुरूनग्निं तथा सूर्यं प्रातः पश्येत्सदा बुधः॥ इति पुराणवचनात् । तव गिरां विस्तरे वाक्प्रपञ्चे । प्रथप्ने वावशब्दे इति घञ्प्रतिषेधात् ऋदोरप् इत्यप् । अतएव विस्तारो विग्रहो व्यासः स तु शब्दस्य विस्तरः इत्यमरः (अमरकोशः ३.२.२२ ) । मतिस्त्वद्बुद्धिरादर्शे दर्पण इव।दर्पणे मुकुरादर्शौ इत्यमरः (अमरकोशः २.६.१४१ ) । विमला विशदाभिदृश्यते । वाग्वैशद्यादेव मतिवैशद्यमनुमीयते । तत्पूर्वकत्वात्तस्येत्यर्थः॥ अथ युग्मेनाह
पदच्छेदः
AI
| अपवर्जितविप्लवे | अपवर्जित–विप्लव (७.१) | in the (speech) devoid of contradiction |
| शुचौ | शुचि (७.१) | in the pure |
| हृदयग्राहिणि | हृदयग्राहिन् (७.१) | in the heart-captivating |
| मङ्गलास्पदे | मङ्गल–आस्पद (७.१) | in the abode of auspiciousness |
| विमला | विमल (१.१) | pure |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| विस्तरे | विस्तर (७.१) | in the discourse |
| गिराम् | गिर् (६.३) | of words |
| मतिः | मति (१.१) | intellect |
| आदर्शे | आदर्श (७.१) | in a mirror |
| इव | इव | like |
| अभिदृश्यते | अभिदृश्यते (अभि√दृश् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is reflected |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | प | व | र्जि | त | वि | प्ल | वे | शु | च | |
| य्हृ | द | य | ग्रा | हि | णि | म | ङ्ग | ला | स्प | दे |
| वि | म | ला | त | व | वि | स्त | रे | गि | रां | |
| म | ति | रा | द | र्श | इ | वा | भि | दृ | श्य | ते |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.