अन्वयः
AI
अभिमानवतः मनस्विनः उच्चैः पदम् आरुरुक्षतः (जनस्य) विनिपातनिवर्तनक्षमम् आत्मपौरुषम् प्रियम् आलम्बनं मतम् ।
English Summary
AI
For a self-respecting, high-minded person who wishes to ascend to a high position, his own valor is considered the preferred support, as it is capable of preventing any downfall.
सारांश
AI
उच्च पद पर आसीन होने की इच्छा रखने वाले स्वाभिमानी और मनस्वी व्यक्ति के लिए अपना पुरुषार्थ ही एकमात्र सहारा है जो उसे पतन से बचा सकता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अभिमानवत इति ॥ अभिमानवतो मानधनस्य प्रियमिष्टमुञ्चैरुन्नतं पदं स्थानं राज्यादिकमारुरुक्षत आरोढुमिच्छतः प्राप्तुकामस्य मनस्विनो धीरस्यात्मपौरुषं स्वपुरुषकार एव विनिपातनिवर्तनक्षममनर्थप्रतीकारसमर्थमालम्बनं सहकारि मतमिष्टम्। यथा कस्यचित्तुङ्गमारोहतः किंचित्पतनप्रतिबन्धकमनुचरहस्तादिकमालम्बनं तद्वदिति ध्वनिः । किं पौरुषादन्यैः सहायैः शूराणामिति भावः ॥ पौरुषानङ्गीकारे दोषमाह
पदच्छेदः
AI
| अभिमानवतः | अभिमानवत् (६.१) | of a self-respecting person |
| मनस्विनः | मनस्विन् (६.१) | of a high-minded person |
| प्रियम् | प्रिय (१.१) | preferred |
| उच्चैः | उच्चैस् | high |
| पदम् | पद (२.१) | position |
| आरुरुक्षतः | आरुरुक्षत् (आ√रुह्+सन्+शतृ, ६.१) | of one who wishes to ascend |
| विनिपातनिवर्तनक्षमम् | विनिपात–निवर्तन–क्षम (१.१) | capable of preventing a downfall |
| मतम् | मत (√मन्+क्त, १.१) | is considered |
| आलम्बनम् | आलम्बन (१.१) | support |
| आत्मपौरुषम् | आत्म–पौरुष (१.१) | one's own valor |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | भि | मा | न | व | तो | म | न | स्वि | नः | |
| प्रि | य | मु | च्चैः | प | द | मा | रु | रु | क्ष | तः |
| वि | नि | पा | त | नि | व | र्त | न | क्ष | मं | |
| म | त | मा | ल | म्ब | न | मा | त्म | पौ | रु | षम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.