अन्वयः
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प्रजाः क्षययुक्तम् अपि, स्वभावजं शिवं धाम दधतम्, समृद्धये उत्थितम्, अनपायं नृपं प्रतिपत् चन्द्रम् इव प्रणमन्ति ।
English Summary
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Subjects bow to a king who, though temporarily diminished, possesses innate auspicious majesty and strives for prosperity, just as people revere the crescent moon on the first day, which, though small, is sure to grow.
सारांश
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जैसे लोग प्रतिपदा के बढ़ते हुए चंद्रमा को प्रणाम करते हैं, वैसे ही प्रजा उस राजा को नमन करती है जो संकट में भी अपने स्वाभाविक तेज को भविष्य की उन्नति के लिए धारण किए रहता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
क्षयेति ॥ क्षययुक्तमप्ति तथा क्षीणमपि सन्तं स्वभावजं सहजं शिवं सर्वलोकाह्लादकं धाम क्षात्रं तेजः प्रकाशं च दधतं समृद्धये वृद्ध्यर्थमुत्थितमुद्युक्तम्। वर्धिष्णुमित्यर्थः । नृपं प्रजाः । प्रतिपच्चन्द्रं द्वितीयाचन्द्रमिवेत्यर्थः । प्रतिपच्छब्देन द्वितीयाग्रहणम् । प्रतिपदि तस्यादृश्यत्वादिति । प्रणमान्ति । प्रह्वीभावेन वर्तन्त इति भावः । चन्द्रं तु नमस्कुर्वन्ति । क्षीणस्याप्युत्साहः कार्यसिद्धेर्निदानमित्यर्थः । ‘जयं हि सततोत्साही दुर्बलोऽपि समश्रुते' इति कामन्दकः ॥ ननु प्रभुशक्तिशून्यस्योत्साहः कुत्रोपयुज्यत इत्यत्राह
पदच्छेदः
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| क्षययुक्तम् | क्षय–युक्त (२.१) | though subject to decline |
| अपि | अपि | even |
| स्वभावजम् | स्वभाव–ज (२.१) | innate |
| दधतम् | दधत् (√धा+शतृ, २.१) | possessing |
| धाम | धामन् (२.१) | majesty |
| शिवम् | शिव (२.१) | auspicious |
| समृद्धये | समृद्धि (४.१) | for prosperity |
| प्रणमन्ति | प्रणमन्ति (प्र√नम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | bow to |
| अनपायम् | अनपाय (२.१) | sure to rise |
| उत्थितम् | उत्थित (उद्√स्था+क्त, २.१) | striving |
| प्रतिपच्चन्द्रम् | प्रतिपद्–चन्द्र (२.१) | the moon of the first day |
| इव | इव | like |
| प्रजाः | प्रजा (१.३) | subjects |
| नृपम् | नृप (२.१) | the king |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्ष | य | यु | क्त | म | पि | स्व | भा | व | जं | |
| द | ध | तं | धा | म | शि | वं | स | मृ | द्ध | ये |
| प्र | ण | म | न्त्य | न | पा | य | मु | त्थि | तं | |
| प्र | ति | प | च्च | न्द्र | मि | व | प्र | जा | नृ | पम् |
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