अणीयसे विश्वविधारिणे नमो
नमोऽन्तिकस्थाय नमो दवीयसे ।
अतीत्य वाचां मनसां च गोचरं
स्थिताय ते तत्पतये नमो नमः ॥
अणीयसे विश्वविधारिणे नमो
नमोऽन्तिकस्थाय नमो दवीयसे ।
अतीत्य वाचां मनसां च गोचरं
स्थिताय ते तत्पतये नमो नमः ॥
नमोऽन्तिकस्थाय नमो दवीयसे ।
अतीत्य वाचां मनसां च गोचरं
स्थिताय ते तत्पतये नमो नमः ॥
अन्वयः
AI
अणीयसे, विश्वविधारिणे नमः । अन्तिकस्थाय नमः, दवीयसे नमः । वाचाम् मनसाम् च गोचरम् अतीत्य स्थिताय, तत्पतये ते नमः नमः ।
English Summary
AI
Salutations to the one who is subtler than the subtle, the sustainer of the universe. Salutations to the one who is near, salutations to the one who is far. Repeated salutations to you, the lord of that which exists beyond the range of speech and mind.
सारांश
AI
सूक्ष्म स्वरूप वाले, सम्पूर्ण विश्व को धारण करने वाले, निकट और दूर स्थित रहने वाले तथा वाणी और मन की पहुँच से परे उस परात्पर परमेश्वर को बार-बार नमस्कार है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अणीयस इति ॥ भवेत्यनुवर्तते । हे भव, अणीयसे सूक्ष्मतराय तथापि विश्वविधारिणे जगद्धारकाय ते तुभ्यं नसः। अन्तिकस्थायान्तर्यामितया संनिकृष्टाय सते। तथापि दवीयसे दुर्ग्रहत्वाद्दूरतराय ते तुभ्यं नमः।वाचां मनसां च गोचरं विषयमतीत्य स्थितायावाङ्मनसगोचराय । तत्पतये तेषां वाङमनसामध्यक्षाय । तर्दध्यक्षस्तैरेव न दृश्यत इति विरोधः। ते तुभ्यं नमो नमः।
चापले द्वे भवत इति वक्तव्यम् इति द्विरुक्तिः । संभ्रमेण प्रवृत्तिश्चापलम् इति काशिका । भक्त्युद्रेकाच्च संभ्रमः । विरोधाभासोऽलंकारः ॥
पदच्छेदः
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| अणीयसे | अणीयस् (४.१) | To the subtlest |
| विश्वविधारिणे | विश्व–विधारिन् (४.१) | to the sustainer of the universe |
| नमः | नमस् | salutations |
| नमः | नमस् | salutations |
| अन्तिकस्थाय | अन्तिकस्थ (४.१) | to the one who is near |
| नमः | नमस् | salutations |
| दवीयसे | दवीयस् (४.१) | to the one who is far |
| अतीत्य | अतीत्य (अति√इ+ल्यप्) | having transcended |
| वाचाम् | वाच् (६.३) | of speech |
| मनसाम् | मनस् (६.३) | of minds |
| च | च | and |
| गोचरम् | गोचर (२.१) | the range |
| स्थिताय | स्थित (√स्था+क्त, ४.१) | to the one who is situated |
| ते | युष्मद् (४.१) | to you |
| तत्पतये | तत्–पति (४.१) | to the lord of that (Brahman) |
| नमः | नमस् | salutations |
| नमः | नमस् | salutations |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | णी | य | से | वि | श्व | वि | धा | रि | णे | न | मो |
| न | मो | ऽन्ति | क | स्था | य | न | मो | द | वी | य | से |
| अ | ती | त्य | वा | चां | म | न | सां | च | गो | च | रं |
| स्थि | ता | य | ते | त | त्प | त | ये | न | मो | न | मः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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