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व्रणमुखच्युतशोणितशीकर-
स्थगितशैलतटाभभुजान्तरः ।
अभिनवौषसरागभृता बभौ
जलधरेण समानमुमापतिः ॥

अन्वयः AI व्रण-मुख-च्युत-शोणित-शीकर-स्थगित-शैल-तट-आभ-भुज-अन्तरः उमा-पतिः अभिनव-औषस-राग-भृता जल-धरेण समानम् बभौ।
English Summary AI Uma's lord (Shiva), his chest resembling a mountain slope covered by sprays of blood flowing from the mouths of wounds (inflicted by Arjuna), shone like a cloud bearing the fresh red hue of dawn.
सारांश AI घावों से निकलते रक्त की बूंदों से ढके पर्वत के समान विशाल वक्षस्थल वाले अर्जुन, नवीन उषा की लाली से युक्त मेघ के समान सुशोभित हुए।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) व्रणेति॥ व्रणमुखेभ्यश्च्युतस्य क्षरितस्य शोणितस्य शीकरैः स्थगितमावृतं शैलतटाभं शिलासदृशं भुजान्तरं वक्षो यस्य स तथोक्त उमापतिरभिनवमौपसरागं संध्यारागंविभर्तीति तथोक्तेन जलधरेण समानं तुल्यं यथा तथा बभावित्युपमा ॥ उरसिशूलभृतः प्रहिता मुहुः प्रतिहतिं ययुरर्जुनवृष्टयः । भृशरया इव सह्यमहीभृतः पृथुनि रोधसि सिन्धुमहोर्मयः
पदच्छेदः AI
व्रणमुखच्युतशोणितशीकरस्थगितशैलतटाभभुजान्तरःव्रणमुखच्युत (√च्यु+क्त)शोणितशीकरस्थगित (√स्थग्+क्त)शैलतटआभभुजान्तर (१.१) whose chest resembled a mountain slope covered by sprays of blood flowing from the mouths of wounds
अभिनवौषसरागभृताअभिनवऔषसरागभृत् (३.१) bearing the fresh red hue of dawn
बभौबभौ (√भा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) shone
जलधरेणजलधर (३.१) with a cloud
समानम्समानम् like
उमापतिःउमापति (१.१) Uma's lord (Shiva)
छन्दः द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
व्र मु च्यु शो णि शी
स्थ गि शै टा भु जा न्त रः
भि वौ रा भृ ता भौ
रे मा मु मा तिः
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