आबाधामरणभयार्चिषा चिराय
प्लुष्टेभ्यो भव महता भवानलेन ।
निर्वाणं समुपगमेन यच्छते ते
बीजानां प्रभव नमोऽस्तु जीवनाय ॥
आबाधामरणभयार्चिषा चिराय
प्लुष्टेभ्यो भव महता भवानलेन ।
निर्वाणं समुपगमेन यच्छते ते
बीजानां प्रभव नमोऽस्तु जीवनाय ॥
प्लुष्टेभ्यो भव महता भवानलेन ।
निर्वाणं समुपगमेन यच्छते ते
बीजानां प्रभव नमोऽस्तु जीवनाय ॥
अन्वयः
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भव, बीजानाम् प्रभव, जीवनाय ते नमः अस्तु । महता भवानलेन आबाधामरणभयार्चिषा चिराय प्लुष्टेभ्यः (जनेभ्यः) समुपगमेन निर्वाणम् यच्छते (ते नमः) ।
English Summary
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O Bhava, O source of all seeds! May there be salutations to you, the life-giver. To you who, by your very approach, grant liberation to those who have long been scorched by the great fire of worldly existence, whose flames are suffering, fear, and death.
सारांश
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हे जीवनदाता! जन्म-मरण के भय की अग्नि से झुलसे हुए जीवों को मोक्ष रूपी शांति प्रदान करने वाले और संसार के उत्पत्ति स्थल आपको बारम्बार नमस्कार है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
आबाधेति ॥ हे भव बीजानां प्रभव कारणभूत ।
जीवानाम् इति पाठे तेषां त्वत्प्रतिबिम्बत्वादिति भावः। आबाधाध्यात्मिकादिदुःखं मरणं पञ्चत्वं ताभ्यां भयं तदेवार्चिर्यस्य तेन महता भवानलेन संसाराग्निना चिराय चिरं प्लुष्टेभ्यो दग्धेभ्यः समुपगमेन संसेवया निर्वाणं संतापशान्तिं यच्छते ददते जीवयतीति जीवनं तस्मै जीवनाय जलात्मने ते तुभ्यं नमः ॥ इदानी नभोमूर्त्तिं स्तौति
पदच्छेदः
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| आबाधामरणभयार्चिषा | आबाधा–मरण–भय–अर्चिस् (३.१) | by the flame of suffering, fear, and death |
| चिराय | चिराय | for a long time |
| प्लुष्टेभ्यः | प्लुष्ट (√प्लुष्+क्त, ४.३) | to those who are scorched |
| भव | भव (८.१) | O Bhava |
| महता | महत् (३.१) | by the great |
| भवानलेन | भव–अनल (३.१) | fire of worldly existence |
| निर्वाणम् | निर्वाण (२.१) | liberation |
| समुपगमेन | समुपगम (सम्+उप√गम्+ल्युट्, ३.१) | by your approach |
| यच्छते | यच्छत् (√दा+शतृ, ४.१) | to the one who gives |
| ते | युष्मद् (४.१) | to you |
| बीजानाम् | बीज (६.३) | of seeds |
| प्रभव | प्रभव (८.१) | O source |
| नमः | नमस् | salutations |
| अस्तु | अस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | be |
| जीवनाय | जीवन (४.१) | to the life-giver |
छन्दः
प्रहर्षिणी [१३: मनजरग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | बा | धा | म | र | ण | भ | या | र्चि | षा | चि | रा | य |
| प्लु | ष्टे | भ्यो | भ | व | म | ह | ता | भ | वा | न | ले | न |
| नि | र्वा | णं | स | मु | प | ग | मे | न | य | च्छ | ते | ते |
| बी | जा | नां | प्र | भ | व | न | मो | ऽस्तु | जी | व | ना | य |
| म | न | ज | र | ग | ||||||||
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