तवोत्तरीयं करिचर्म साङ्गजं
ज्वलन्मणिः सारशनं महानहिः ।
स्रगास्यपङ्क्तिः शवभस्म चन्दनं
कला हिमांशोश्च समं चकासति ॥
तवोत्तरीयं करिचर्म साङ्गजं
ज्वलन्मणिः सारशनं महानहिः ।
स्रगास्यपङ्क्तिः शवभस्म चन्दनं
कला हिमांशोश्च समं चकासति ॥
ज्वलन्मणिः सारशनं महानहिः ।
स्रगास्यपङ्क्तिः शवभस्म चन्दनं
कला हिमांशोश्च समं चकासति ॥
अन्वयः
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तव उत्तरीयम् साङ्गजम् करिचर्म, सारशनम् ज्वलन्मणिः महान् अहिः, स्रक् आस्यपङ्क्तिः, चन्दनम् शवभस्म, हिमांशोः कला च समम् चकासति ।
English Summary
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Your upper garment is the elephant hide with its limbs, your girdle is a great serpent with a shining gem, your garland is a row of skulls, your sandal-paste is funeral ash, and the digit of the moon—all these shine equally on You.
सारांश
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आपके शरीर पर गजचर्म, करधनी के रूप में सर्प और मणि, मुण्डमाला, भस्म और मस्तक पर चन्द्रकला - ये सब परस्पर विरोधी वस्तुएँ एक साथ सुशोभित होकर आपकी शोभा बढ़ाती हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
तवेति ॥ हे देव, तव साङ्गजं सलोमकं करिचर्मोत्तरीयं संव्यानम् । दुःस्पर्शमिति भावः।
संव्यानमुत्तरीयं च इत्यमर । ज्वलन्मणिर्ज्वलद्रत्नो महानहिःसारशनं कटिभूषाविशेषः। योऽन्येषां प्राणहर इत्यर्थः । क्लीबे सारशनं चाथ पुंस्कट्यां शृङ्खलं त्रिषु इत्यमरः (अमरकोशः २.६.११० ) ।आस्यपङ्क्तिः कपालमाला स्त्रङ्माल्यम् । शवभस्म चन्दनम् । उभयत्राप्यस्पृश्यममङ्गलं चेति भावः। किंच। एतानि वस्तूनि हिमांशोः कला च समं तुल्यतया चकासति दीप्यन्ते । त्वदाश्रयवशादरम्यस्यापि रम्यतेति किमशक्यं तवेति भावः ॥
पदच्छेदः
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| तव | युष्मद् (६.१) | Your |
| उत्तरीयम् | उत्तरीय (१.१) | upper garment |
| करिचर्म | करिन्–चर्मन् (१.१) | is elephant hide |
| साङ्गजम् | साङ्गज (१.१) | with its limbs |
| ज्वलन्मणिः | ज्वलत् (√ज्वल्+शतृ)–मणि (१.१) | a shining gem |
| सारशनम् | सारशन (१.१) | girdle |
| महान् | महत् (१.१) | great |
| अहिः | अहि (१.१) | serpent |
| स्रक् | स्रज् (१.१) | garland |
| आस्यपङ्क्तिः | आस्यपङ्क्ति (१.१) | is a row of skulls |
| शवभस्म | शवभस्म (१.१) | funeral ash |
| चन्दनम् | चन्दन (१.१) | is sandal-paste |
| कला | कला (१.१) | the digit |
| हिमांशोः | हिमांशु (६.१) | of the moon |
| च | च | and |
| समम् | समम् | equally |
| चकासति | चकासति (√कास् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shine |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | वो | त्त | री | यं | क | रि | च | र्म | सा | ङ्ग | जं |
| ज्व | ल | न्म | णिः | सा | र | श | नं | म | हा | न | हिः |
| स्र | गा | स्य | प | ङ्क्तिः | श | व | भ | स्म | च | न्द | नं |
| क | ला | हि | मां | शो | श्च | स | मं | च | का | स | ति |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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