न रागि चेतः परमा विलासिता
वधूः शरीरेऽस्ति न चास्ति मन्मथः ।
नमस्क्रिया चोषसि दातुरित्यहो
निसर्गदुर्बोधमिदं तवेहितम् ॥
न रागि चेतः परमा विलासिता
वधूः शरीरेऽस्ति न चास्ति मन्मथः ।
नमस्क्रिया चोषसि दातुरित्यहो
निसर्गदुर्बोधमिदं तवेहितम् ॥
वधूः शरीरेऽस्ति न चास्ति मन्मथः ।
नमस्क्रिया चोषसि दातुरित्यहो
निसर्गदुर्बोधमिदं तवेहितम् ॥
अन्वयः
AI
चेतः न रागि, (किन्तु) परमा विलासिता (अस्ति) । वधूः शरीरे अस्ति, मन्मथः च न अस्ति । उषसि दातुः नमस्क्रिया च (अस्ति) । अहो, तव इदम् ईहितम् निसर्गदुर्बोधम् इति ।
English Summary
AI
Your mind is not attached, yet there is supreme playfulness. A wife (Parvati) is part of your body, yet there is no Kama (god of love). You are the giver of boons, yet you perform salutations at dawn. Oh, this nature of Yours is inherently difficult to comprehend!
सारांश
AI
हे देव! आपके हृदय में राग नहीं है फिर भी वाम भाग में पार्वती हैं, कामदेव नहीं है फिर भी आप वरदाता हैं। आपकी यह चेष्टा स्वभाव से ही अत्यन्त रहस्यमयी और दुर्बोध है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
न रागीति॥ हे देव, चेतस्तव चित्तं रागि रागयुक्तं न । परमयोगित्वादिति भावः । तथापि परमा निरतिशया विलासिता शृङ्गारादिचेष्टाशीलता।भिक्षाटनादिषु विहरणेन तौर्यत्रिकव्यसनितया चेति भावः।किंच।शरीरेऽर्धाङ्गे वधूरस्ति । प्रसिद्धं चैतदिति भावः। तथापि मन्मथः कामश्च नास्ति । तस्य भस्मीकरणादिति भावः। किंच । उषसि प्रातः संध्यायां धातुर्ब्रह्मणो नमस्क्रियां वन्दनम् । स्वयं जगद्वन्द्यस्यापीत्यर्थः। इतीत्थं विरुद्धमिदमुक्तं तवेहितं चेष्टितं निसर्गतो दुर्बोधं दुराकलनीयम् । दुर्ग्रहमित्यर्थः । अदृष्टपूर्वत्वादिति भावः । वंशस्थं वृत्तम् ॥
पदच्छेदः
AI
| न | न | not |
| रागि | रागिन् (१.१) | is attached |
| चेतः | चेतस् (१.१) | Your mind |
| परमा | परमा (१.१) | supreme |
| विलासिता | विलसिता (१.१) | playfulness |
| वधूः | वधू (१.१) | a wife |
| शरीरे | शरीर (७.१) | in Your body |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| न | न | not |
| च | च | and |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| मन्मथः | मन्मथ (१.१) | Kama (god of love) |
| नमस्क्रिया | नमस्क्रिया (१.१) | salutation |
| च | च | and |
| उषसि | उषस् (७.१) | at dawn |
| दातुः | दातृ (६.१) | of the giver |
| इति | इति | thus |
| अहो | अहो | Oh |
| निसर्गदुर्बोधम् | निसर्ग–दुर्बोध (१.१) | inherently difficult to comprehend |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| तव | युष्मद् (६.१) | Your |
| ईहितम् | ईहित (√ईह्+क्त, १.१) | nature |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | रा | गि | चे | तः | प | र | मा | वि | ला | सि | ता |
| व | धूः | श | री | रे | ऽस्ति | न | चा | स्ति | म | न्म | थः |
| न | म | स्क्रि | या | चो | ष | सि | दा | तु | रि | त्य | हो |
| नि | स | र्ग | दु | र्बो | ध | मि | दं | त | वे | हि | तम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.