युक्ताः स्वशक्त्या मुनयः प्रजानां
हितोपदेशैरुपकारवन्तः ।
समुच्छिनत्सि त्वमचिन्त्यधामा
कर्माण्युपेतस्य दुरुत्तराणि ॥
युक्ताः स्वशक्त्या मुनयः प्रजानां
हितोपदेशैरुपकारवन्तः ।
समुच्छिनत्सि त्वमचिन्त्यधामा
कर्माण्युपेतस्य दुरुत्तराणि ॥
हितोपदेशैरुपकारवन्तः ।
समुच्छिनत्सि त्वमचिन्त्यधामा
कर्माण्युपेतस्य दुरुत्तराणि ॥
अन्वयः
AI
मुनयः स्वशक्त्या युक्ताः (सन्तः) हितोपदेशैः प्रजानाम् उपकारवन्तः (भवन्ति) । अचिन्त्यधामा त्वम् उपेतस्य दुरुत्तराणि कर्माणि समुच्छिनत्सि ।
English Summary
AI
Sages, according to their own capacity, are helpful to people through beneficial instructions. But You, O one of inconceivable glory, completely sever the difficult-to-overcome karmas of one who approaches You.
सारांश
AI
हे अचिन्त्य महिमा वाले! मुनिजन तो केवल उपदेशों से उपकार करते हैं, किन्तु आप अपनी शक्ति से शरणागत के उन प्रारब्ध कर्मों को भी नष्ट कर देते हैं जिन्हें पार करना असम्भव है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
युक्ता इति ॥ मुनयो व्यासादयः स्वशत्तया निजयोगमहिम्ना युक्ताः । तथा हितोपदेशैर्विधिनिषेधवाक्यैः स्मृतीतिहासपुराणमुखेन प्रजानामुपकारवन्तः कृतोपकाराश्च । मोक्षप्रदस्तु तेषामन्येषां च त्वमेवेत्याह-समिति । अचिन्त्यधामाचिन्त्यमहिमा त्वमेवो पेतस्य शरणं प्राप्तस्य प्रपन्नस्य संबन्धीनि दुरुत्तराणि सुदुस्तराणि कर्माणि बन्धकानि पुण्यपापानि समुच्छिनत्सि नाशयसि । ते त्वत्रासमर्था एवेति भावः ॥
पदच्छेदः
AI
| युक्ताः | युक्त (√युज्+क्त, १.३) | endowed |
| स्वशक्त्या | स्वशक्ति (३.१) | with their own capacity |
| मुनयः | मुनि (१.३) | sages |
| प्रजानाम् | प्रजा (६.३) | for people |
| हितोपदेशैः | हित–उपदेश (३.३) | with beneficial instructions |
| उपकारवन्तः | उपकारवत् (१.३) | are helpful |
| समुच्छिनत्सि | समुच्छिनत्सि (सम्+उद्√छिद् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | You sever completely |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | You |
| अचिन्त्यधामा | अचिन्त्य–धामन् (१.१) | O one of inconceivable glory |
| कर्माणि | कर्मन् (२.३) | the karmas |
| उपेेतस्य | उपेेत (उप√इ+क्त, ६.१) | of one who approaches |
| दुरुत्तराणि | दुरुत्तर (२.३) | difficult-to-overcome |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यु | क्ताः | स्व | श | क्त्या | मु | न | यः | प्र | जा | नां |
| हि | तो | प | दे | शै | रु | प | का | र | व | न्तः |
| स | मु | च्छि | न | त्सि | त्व | म | चि | न्त्य | धा | मा |
| क | र्मा | ण्यु | पे | त | स्य | दु | रु | त्त | रा | णि |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.