कृतधृति परिवन्दितेनोच्चकै-
र्गणपतिभिरभिन्नरोमोद्गमैः ।
तपसि कृतफले फलज्यायसी
स्तुतिरिति जगदे हरेः सूनुना ॥
कृतधृति परिवन्दितेनोच्चकै-
र्गणपतिभिरभिन्नरोमोद्गमैः ।
तपसि कृतफले फलज्यायसी
स्तुतिरिति जगदे हरेः सूनुना ॥
र्गणपतिभिरभिन्नरोमोद्गमैः ।
तपसि कृतफले फलज्यायसी
स्तुतिरिति जगदे हरेः सूनुना ॥
अन्वयः
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तपसि कृतफले (सति), कृतधृतिः (सन्) अभिन्नरोमोद्गमैः गणपतिभिः उच्चकैः परिवन्दितेन हरेः सूनुना, "स्तुतिः फलज्यायसी" इति जगदे ।
English Summary
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As his penance bore fruit, Arjuna, son of Indra, who was praised aloud by the composed Gana-chiefs whose hair did not stand on end, spoke these words: "Praise is greater than the fruit itself."
सारांश
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शिवगणों द्वारा पूजित अर्जुन ने धैर्यपूर्वक महादेव की स्तुति की। उसने विचार किया कि तपस्या के सफल होने पर की गई स्तुति अधिक फलदायी होती है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
कृतेति ॥ अभिन्नरोमोद्गमैरविरलरोमाञ्चैर्गणपतिभिः प्रमथमुख्यैरुच्चकैः परिवन्दितेन साधु साध्विति संस्तुतेन।'वदि अभिवादनस्तुत्योः। कर्मणि क्तः। हरेः सूनुनार्जुनेन तपसि । कृतं फलं भगवत्साक्षात्कारलक्षणं येन तस्मिन् । कृतफले सतीत्यर्थः । कृतधृति कृतसंतोषं यथा तथा फलज्यायसी फलाधिकेति वक्ष्यमाणा स्तुतिर्जगदे कथिता।
पदच्छेदः
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| कृतधृति | कृत (√कृ+क्त)–धृति (१.१) | having composed himself |
| परिवन्दितेन | परिवन्दित (परि√वन्द्+क्त, ३.१) | by the one who was praised |
| उच्चकैः | उच्चकैस् | aloud |
| गणपतिभिः | गणपति (३.३) | by the Gana-chiefs |
| अभिन्नरोमोद्गमैः | अभिन्न (√भिद्+क्त)–रोम–उद्गम (३.३) | by those whose hair did not stand on end |
| तपसि | तपस् (७.१) | the penance |
| कृतफले | कृत (√कृ+क्त)–फल (७.१) | when the fruit was obtained |
| फलज्यायसी | फल–ज्यायस् (१.१) | is greater than the fruit |
| स्तुतिः | स्तुति (१.१) | praise |
| इति | इति | thus |
| जगदे | जगदे (√गद् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was spoken |
| हरेः | हर (६.१) | of Hara (Shiva) |
| सूनुना | सूनु (३.१) | by the son (Arjuna) |
छन्दः
प्रमुदितवदना [१२: ननरर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | त | धृ | ति | प | रि | व | न्दि | ते | नो | च्च | कै |
| र्ग | ण | प | ति | भि | र | भि | न्न | रो | मो | द्ग | मैः |
| त | प | सि | कृ | त | फ | ले | फ | ल | ज्या | य | सी |
| स्तु | ति | रि | ति | ज | ग | दे | ह | रेः | सू | नु | ना |
| न | न | र | र | ||||||||
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