अथ हिमशुचिभस्मभूषितं
शिरसि विराजितमिन्दुलेखया ।
स्ववपुरतिमनोहरं हरं
दधतमुदीक्ष्य ननाम पाण्डवः ॥

अन्वयः AI अथ पाण्डवः हिमशुचिभस्मभूषितम्, शिरसि इन्दुलेखया विराजितम्, अतिमनोहरम् स्ववपुः दधतम् हरम् उदीक्ष्य ननाम ।
English Summary AI Then, the son of Pandu (Arjuna), seeing Hara (Shiva) bearing his own exceedingly charming form—adorned with ash as pure as snow and graced on the head by the crescent moon—bowed down to him.
सारांश AI इसके बाद, बर्फ के समान श्वेत भस्म से सुशोभित और मस्तक पर चंद्रमा की कला धारण किए हुए भगवान शिव के अत्यंत मनमोहक वास्तविक रूप को देखकर अर्जुन ने उन्हें प्रणाम किया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) अथेति ॥ अथ हिमशुचिना हिमशुभ्रेण भस्मना भूषितं शिरसीन्दुलेखया विराजितं शोभितमतिमनोहरं सुन्दरं स्ववपुर्दधतं किरातरूपं विहाय निजविंग्रहं दधानं हरमुदीक्ष्य पाण्डवो ननाम प्रणतवान् । अपरवक्रं वृत्तम् —अयुजि ननरला गुरुः समे तदपरवक्रमिदं नजौ जरौ इति लक्षणात् ॥
पदच्छेदः AI
अथअथ Then
हिमशुचिभस्मभूषितम्हिमशुचिभस्म–भूषित (√भूष्+क्त, २.१) adorned with ash as pure as snow
शिरसिशिरस् (७.१) on the head
विराजितम्विराजित (वि√राज्+णिच्+क्त, २.१) graced
इन्दुलेखयाइन्दुलेखा (३.१) by the crescent moon
स्ववपुःस्ववपुस् (२.१) his own form
अतिमनोहरम्अतिमनोहर (२.१) exceedingly charming
हरम्हर (२.१) Hara (Shiva)
दधतम्दधत् (√धा+शतृ, २.१) bearing
उदीक्ष्यउदीक्ष्य (उद्√ईक्ष्+ल्यप्) having seen
ननामननाम (√नम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) bowed down
पाण्डवःपाण्डव (१.१) the son of Pandu (Arjuna)
छन्दः अपरवक्त्र
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
हि शु चि स्म भू षि तं
शि सि वि रा जि मि न्दु ले या
स्व पु ति नो रं रं
मु दी क्ष्य ना पा ण्ड वः
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