अन्वयः
AI
वृषकपिध्वजयोः प्रचलिते (सति) असहिष्णुना भूभृता अभावभयात् इव मुहुः चलितम्, आस्थिते (सति) स्थितम्, विनमिते (सति) नतम्, उन्नतौ (सति) उन्नतम् ।
English Summary
AI
As the one with the bull banner (Shiva) and the one with the monkey banner (Arjuna) moved, the mountain, unable to bear them, also moved. When they stood still, it stood still; when they bent down, it bent; when they rose up, it rose up, as if repeatedly fearing its own destruction.
सारांश
AI
शिव और अर्जुन के चलने, रुकने, झुकने और उठने के साथ पृथ्वी भी वैसे ही चेष्टाएँ कर रही थी, मानो वह उन दोनों के असहनीय भार से नष्ट होने के भय से काँप रही हो।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
प्रचलिते इति ॥ असहिष्णुना तयोर्भारमसहमानेन भूभृता शैलेनाभावभयाद्विनाशभयादिव मुहुर्वृषश्च कपिश्च ध्वजे ययोस्तयोर्वृषकपिध्वजयोः प्रचलिते चलने सति चलितं प्रचेले । आस्थिते तूष्णीमवस्थाने स्थितं तथैव तस्थे । विनमिते सम्यगाक्रमणे सति नतं नम्रीभूतम् । अनामीति यावत् । उन्नतावुन्नमने सत्युन्नतमुदनामि। सर्वत्र भावे क्तः।
पदच्छेदः
AI
| प्रचलिते | प्रचलित (प्र√चल्+क्त, ७.१) | when they moved |
| चलितम् | चलित (√चल्+क्त, १.१) | it was moved |
| स्थितम् | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | it was stood still |
| आस्थिते | आस्थित (आ√स्था+क्त, ७.१) | when they stood still |
| विनमिते | विनमित (वि√नम्+णिच्+क्त, ७.१) | when they bent down |
| नतम् | नत (√नम्+क्त, १.१) | it was bent |
| उन्नतम् | उन्नत (उद्√नम्+क्त, १.१) | it was raised |
| उन्नतौ | उन्नत (उद्√नम्+क्त, ७.१) | when they rose up |
| वृषकपिध्वजयोः | वृषध्वज–कपिध्वज (६.२) | of the bull-bannered (Shiva) and monkey-bannered (Arjuna) ones |
| असहिष्णुना | असहिष्णु (√सह्+इष्णुच्, ३.१) | by the intolerant |
| मुहुः | मुहुर् | repeatedly |
| अभावभयात् | अभाव–भय (५.१) | from fear of non-existence |
| इव | इव | as if |
| भूभृता | भूभृत् (३.१) | by the mountain |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | च | लि | ते | च | लि | तं | स्थि | त | मा | स्थि | ते |
| वि | न | मि | ते | न | त | मु | न्न | त | मु | न्न | तौ |
| वृ | ष | क | पि | ध्व | ज | यो | र | स | हि | ष्णु | ना |
| मु | हु | र | भा | व | भ | या | दि | व | भू | भृ | ता |
| न | भ | भ | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.