Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

क्रोधान्धकारान्तरितो रणाय
भ्रूभेदरेखाः स बभार तिस्रः ।
घनोपरुद्धः प्रभवाय वृष्टे-
रूर्ध्वांशुराजीरिव तिग्मरश्मिः ॥

अन्वयः AI क्रोधअन्धकारान्तरितः सः रणाय तिस्रः भ्रूभेदरेखाः बभार, वृष्टेः प्रभवाय घनउपरुद्धः तिग्मरश्मिः ऊर्ध्वांशुराजीः इव।
English Summary AI Veiled by the darkness of his anger, he bore three furrowed brow-lines for the battle, just as the sharp-rayed sun, obstructed by a cloud for the purpose of producing rain, bears upward-pointing rows of rays.
सारांश AI क्रोध के अंधकार से घिरे हुए अर्जुन ने युद्ध के लिए अपने ललाट पर क्रोध की तीन रेखाएं धारण कीं, जैसे बादलों से ढका हुआ सूर्य ऊपर की ओर उठती किरणों को प्रकट करता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) क्रोधेति ॥क्रोधोऽन्धकार इव तेनान्तरित आवृतः सोऽर्जुनो घनोपरुद्धो मेघावृतस्तिग्मरश्मी रविर्वृष्टेः प्रभवाय वर्षणाय तिस्र ऊर्ध्वाम्शूनां राजीरिव । अर्कस्योर्ध्वाम्शुरेखोदयो वृष्टिलिङ्गमित्यागमः । रणाय रणप्रवृत्तये तिस्त्रस्त्रिसंख्या भ्रूभेदो भ्रूभङ्गस्तस्य रेखा बभार ॥ सप्रध्वनय्यम्बुदनादि चापं हस्तेन दिङ्नाग इवाद्रिशृङ्गम् । बलानि शंभोरिषुभिस्तताप चेतांसि चिन्ताभिरिवाशरीरः
पदच्छेदः AI
क्रोधान्धकारान्तरितःक्रोधअन्धकारअन्तरित (अन्तर्√इ+क्त, १.१) veiled by the darkness of anger
रणायरण (४.१) for battle
भ्रूभेदरेखाःभ्रूभेदरेखा (२.३) furrowed brow-lines
तद् (१.१) he
बभारबभार (√भृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) bore
तिस्रःत्रि (२.३) three
घनोपरुद्धःघनउपरुद्ध (उप√रुध्+क्त, १.१) obstructed by a cloud
प्रभवायप्रभव (४.१) for producing
वृष्टेःवृष्टि (६.१) of rain
ऊर्ध्वांशुराजीरिवऊर्ध्वअंशु–राजीः (२.३)इव like upward-pointing rows of rays
तिग्मरश्मिःतिग्मरश्मि (१.१) the sharp-rayed sun
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
क्रो धा न्ध का रा न्त रि तो णा
भ्रू भे रे खाः भा ति स्रः
नो रु द्धः प्र वा वृ ष्टे
रू र्ध्वां शु रा जी रि ति ग्म श्मिः
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.