आक्षिप्तचापावरणेषुजाल-
श्छिन्नोत्तमासिः स मृधेऽवधूतः ।
रिक्तः प्रकाशश्च बभूव भूमे-
रुत्सादितोद्यान इव प्रदेशः ॥
आक्षिप्तचापावरणेषुजाल-
श्छिन्नोत्तमासिः स मृधेऽवधूतः ।
रिक्तः प्रकाशश्च बभूव भूमे-
रुत्सादितोद्यान इव प्रदेशः ॥
श्छिन्नोत्तमासिः स मृधेऽवधूतः ।
रिक्तः प्रकाशश्च बभूव भूमे-
रुत्सादितोद्यान इव प्रदेशः ॥
अन्वयः
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मृधे आक्षिप्त-चाप-आवरण-इषु-जालः, छिन्न-उत्तम-असिः, अवधूतः सः (अर्जुनः) रिक्तः प्रकाशः च बभूव, उत्सादित-उद्यानः भूमेः प्रदेशः इव।
English Summary
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In the battle, Arjuna—his bow, quiver, and net of arrows snatched away, his excellent sword shattered, and himself overpowered—became both empty-handed and conspicuous, like a plot of land whose garden has been destroyed.
सारांश
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धनुष, कवच, बाण और तलवार से रहित होकर अर्जुन उस भूमि के समान रिक्त और प्रभाहीन दिखाई देने लगे जिसका सुंदर उपवन उजाड़ दिया गया हो।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
आक्षिप्तेति ॥ आक्षिप्तान्यपहृतानि चापावरणेषुजालानि धनुर्वर्मबाणसमूहा यस्य स छिन्नोत्तमासिर्लूनमहाखड्गो मृधे रणे।
मृधमास्कन्दनं संख्यम् इत्यमरः (अमरकोशः २.८.१०४ ) । अवधूतो निरस्तः सोऽर्जुन उत्सादितमुत्पाटितमुद्यानं यस्य स भूमेः प्रदेशो भूमिभाग इव रिक्तः शून्यः प्रकाशो निःसंबाधश्च । दृश्य इति यावत् । बभूव ॥
पदच्छेदः
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| आक्षिप्तचापावरणेषुजालः | आक्षिप्त (आ√क्षिप्+क्त)–चाप–आवरण–इषु–जाल (१.१) | he whose bow, quiver, and net of arrows were snatched away |
| छिन्नोत्तमासिः | छिन्न (√छिद्+क्त)–उत्तम–असि (१.१) | whose excellent sword was shattered |
| सः | तद् (१.१) | he |
| मृधे | मृध् (७.१) | in the battle |
| अवधूतः | अवधूत (अव√धू+क्त, १.१) | overpowered |
| रिक्तः | रिक्त (√रिच्+क्त, १.१) | empty-handed |
| प्रकाशः | प्रकाश (१.१) | conspicuous |
| च | च | and |
| बभूव | बभूव (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| भूमेः | भूमि (६.१) | of the land |
| उत्सादितोद्यानः | उत्सादित (उद्√सद्+णिच्+क्त)–उद्यान (१.१) | whose garden has been destroyed |
| इव | इव | like |
| प्रदेशः | प्रदेश (१.१) | a plot |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | क्षि | प्त | चा | पा | व | र | णे | षु | जा | ल |
| श्छि | न्नो | त्त | मा | सिः | स | मृ | धे | ऽव | धू | तः |
| रि | क्तः | प्र | का | श | श्च | ब | भू | व | भू | मे |
| रु | त्सा | दि | तो | द्या | न | इ | व | प्र | दे | शः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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