यथा निजे वर्त्मनि भाति भाभि-
श्च्यायामयश्चाप्सु सहस्ररश्मिः ।
तथा नभस्याशु रणस्थलीषु
स्पष्टद्विमूर्तिर्ददृशे स भूतैः ॥
यथा निजे वर्त्मनि भाति भाभि-
श्च्यायामयश्चाप्सु सहस्ररश्मिः ।
तथा नभस्याशु रणस्थलीषु
स्पष्टद्विमूर्तिर्ददृशे स भूतैः ॥
श्च्यायामयश्चाप्सु सहस्ररश्मिः ।
तथा नभस्याशु रणस्थलीषु
स्पष्टद्विमूर्तिर्ददृशे स भूतैः ॥
अन्वयः
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यथा सहस्र-रश्मिः निजे वर्त्मनि (नभसि) भाभिः भाति च, अप्सु च्छाया-मयः (भाति), तथा सः (अर्जुनः) नभसि (आकाशे) आशु रण-स्थलीषु च स्पष्ट-द्वि-मूर्तिः भूतैः ददृशे।
English Summary
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Just as the sun shines with its rays in its own path (the sky) and also appears as a reflection in water, so too was Arjuna seen by Shiva's attendants with two distinct forms: one moving swiftly in the sky and the other on the battlefield.
सारांश
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जिस प्रकार सूर्य आकाश और जल के प्रतिबिंब में एक साथ दिखता है, उसी प्रकार अर्जुन अपनी फुर्ती के कारण रणभूमि और आकाश में एक साथ दो रूपों में स्पष्ट दिखाई दे रहे थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
यथेति ॥ भामिर्दीप्तिभिरुपलक्षितः ।
स्युः प्रभारुग्रुचिस्त्विइभाभाश्छविद्युतिदीप्तयः इत्यमरः (अमरकोशः १.३.३८ ) । सहस्ररश्मिरर्को यथा निजे वर्त्मनि नभसि च्छायामयः प्रतिबिम्बरूपः सन्नप्सु स्पष्टद्विमूर्तिर्भाति तथा सोऽर्जुनो नमस्याकाशे रणस्थलीषु च स्पष्टे द्वे मूर्ती यस्य स स्पष्टद्विमूर्तिः सन् भूतैर्गणैर्ददृशे दृष्टः । यथैकोऽर्को नभस्यप्सु चानेक इव दृश्यते तथा सोऽपि दिवि भुवि चाशुसंचाराद्यौगपद्यभ्रमादेवैकोऽप्यनेक इव गणैर्दष्ट इत्युत्प्रेक्षा ॥
पदच्छेदः
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| यथा | यथा | Just as |
| निजे | निज (७.१) | in its own |
| वर्त्मनि | वर्त्मन् (७.१) | path |
| भाति | भाति (√भा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shines |
| भाभिः | भास् (३.३) | with its rays |
| च्छायामयः | छाया–मय (१.१) | as a reflection |
| च | च | and |
| अप्सु | अप् (७.३) | in the waters |
| सहस्ररश्मिः | सहस्र–रश्मि (१.१) | the thousand-rayed one (sun) |
| तथा | तथा | so too |
| नभसि | नभस् (७.१) | in the sky |
| आशु | आशु | swiftly |
| रणस्थलीषु | रण–स्थली (७.३) | on the battlefields |
| स्पष्टद्विमूर्तिः | स्पष्ट–द्वि–मूर्ति (१.१) | with two distinct forms |
| ददृशे | ददृशे (√दृश् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was seen |
| सः | तद् (१.१) | he |
| भूतैः | भूत (३.३) | by the attendants (of Shiva) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | था | नि | जे | व | र्त्म | नि | भा | ति | भा | भि |
| श्च्या | या | म | य | श्चा | प्सु | स | ह | स्र | र | श्मिः |
| त | था | न | भ | स्या | शु | र | ण | स्थ | ली | षु |
| स्प | ष्ट | द्वि | मू | र्ति | र्द | दृ | शे | स | भू | तैः |
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