रयेण सा संनिदधे पतन्ती
भवोद्भवेनात्मनि चापयष्टिः ।
समुद्धता सिन्धुरनेकमार्गा
परे स्थितेनौजसि जह्नुनेव ॥

अन्वयः AI रयेण पतन्ती सा चाप-यष्टिः, परे ओजसि स्थितेन भव-उद्भवेन (शिवेन) आत्मनि संनिदधे, जह्नुना समुद्धता अनेक-मार्गा सिन्धुः इव।
English Summary AI That falling bow-staff, struck with force, was absorbed into the body of Shiva, who stood with supreme power, just as the multi-channelled river Ganges, when checked by the sage Jahnu, was absorbed by him.
सारांश AI अर्जुन का वह धनुष शिव के शरीर से टकराते ही उनके तेज में वैसे ही विलीन हो गया, जैसे वेगवती और अनेक धाराओं वाली गंगा जह्नु ऋषि के शरीर में समा गई थी।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) रयेणेति ॥रयेण वेगेन पतन्ती सा चापयष्टिर्भवस्य संसारस्योद्भव उत्पत्तिर्यस्मात्तेनभवोद्भवेनेश्वरेण पर ओजसि परमे ज्योतिषि स्थितेन जह्नुना राजर्षिणा समुद्धतात्युत्कटानेकमार्गा त्रिस्रोताः सिन्धुर्गङ्गेवात्मनि संनिदधे सम्यङ्निहिता । श्रन्तर्निलायितेत्यर्थः॥
पदच्छेदः AI
रयेणरय (३.१) with force
सातद् (१.१) that
संनिदधेसंनिदधे (सम्+नि√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) was absorbed
पतन्तीपतन्ती (√पत्+शतृ+ङीप्, १.१) falling
भवोद्भवेनभवउद्भव (३.१) by the one born of Bhava (Shiva)
आत्मनिआत्मन् (७.१) into himself
चापयष्टिःचापयष्टि (१.१) bow-staff
समुद्धतासमुद्धृता (सम्+उद्√हृ+क्त+टाप्, १.१) checked/swallowed
सिन्धुःसिन्धु (१.१) the river (Ganges)
अनेकमार्गाअनेकमार्ग (१.१) multi-channelled
परेपर (७.१) in supreme
स्थितेनस्थित (√स्था+क्त, ३.१) by the one standing
ओजसिओजस् (७.१) power
जह्नुनाजह्नु (३.१) by Jahnu
इवइव like
छन्दः उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
ये सा सं नि धे न्ती
वो द्भ वे ना त्म नि चा ष्टिः
मु द्ध ता सि न्धु ने मा र्गा
रे स्थि ते नौ सि ह्नु ने
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