संरम्भवेगोज्झितवेदनेषु
गात्रेषु बाहिर्यमुपागतेषु ।
मुनेर्बभूवागणितेषुराशे-
र्लौहस्तिरस्कार इवात्ममन्युः ॥
संरम्भवेगोज्झितवेदनेषु
गात्रेषु बाहिर्यमुपागतेषु ।
मुनेर्बभूवागणितेषुराशे-
र्लौहस्तिरस्कार इवात्ममन्युः ॥
गात्रेषु बाहिर्यमुपागतेषु ।
मुनेर्बभूवागणितेषुराशे-
र्लौहस्तिरस्कार इवात्ममन्युः ॥
अन्वयः
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संरम्भ-वेग-उज्झित-वेदनेषु बाहिर्यम् उपागतेषु गात्रेषु (सत्सु), अगणित-इषु-राशेः मुनेः आत्म-मन्युः लौहः तिरस्कारः इव बभूव।
English Summary
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As the sage's limbs, having lost all sensation of pain due to the force of his fury, became numb, his own anger, directed at his now-disregarded stock of arrows, became like a contempt for iron itself.
सारांश
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क्रोध के आवेग में शरीर की पीड़ा को भूल चुके मुनि अर्जुन को शिव के वे लौह बाण अपने ही संचित क्रोध के मूर्त रूप के समान प्रतीत हो रहे थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
संरम्भेति ॥ संरम्भवेगेन संभ्रमातिशयेनोज्झितवेदनेषु त्यक्तदुःखेषु गात्रेषु बाधिर्यं स्तैमित्यमुपागतेषु सत्सु न गणिता इषुराशयो येन तस्यागणितेषुराशेर्मुनेरर्जुनस्यात्ममन्युः स्वकोपो लोहस्य विकारो लौहः कार्ष्णायसः तिरस्क्रियत आच्छाद्यतेऽनेनेति तिरस्कार: कञ्चुक इव बभूव । रोषवशान्न किंचित्प्रहारंदुःखमज्ञासीदित्यर्थः । क्रोधैकवर्मणां वीराणां किमन्यैर्लोहभारैरिति भावः ॥ अथ युग्मेनाह
पदच्छेदः
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| संरम्भवेगोज्झितवेदनेषु | संरम्भ–वेग–उज्झित (उद्√झ+क्त)–वेदन (७.३) | in which the sensation of pain was lost due to the force of fury |
| गात्रेषु | गात्र (७.३) | in the limbs |
| बाहिर्यम् | बाहिर्य (२.१) | insensibility |
| उपागतेषु | उपागत (उप+आ√गम्+क्त, ७.३) | having attained |
| मुनेः | मुनि (६.१) | of the sage |
| बभूव | बभूव (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| अगणितेषुराशेः | अगणित (√गण्+क्त)–इषु–राशि (६.१) | of him whose stock of arrows was disregarded |
| लौहः | लौह (१.१) | related to iron |
| तिरस्कारः | तिरस्कार (तिरस्√कृ+घञ्, १.१) | contempt |
| इव | इव | like |
| आत्ममन्युः | आत्मन्–मन्यु (१.१) | his own anger |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | र | म्भ | वे | गो | ज्झि | त | वे | द | ने | षु |
| गा | त्रे | षु | बा | हि | र्य | मु | पा | ग | ते | षु |
| मु | ने | र्ब | भू | वा | ग | णि | ते | षु | रा | शे |
| र्लौ | ह | स्ति | र | स्का | र | इ | वा | त्म | म | न्युः |
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