स्थितं विशुद्धे नभसीव सत्त्वे
धाम्ना तपोवीर्यमयेन युक्तम् ।
शस्त्राभिघातैस्तमजस्रमीश-
स्त्वष्टा विवस्वन्तमिवोल्लिलेख ॥

अन्वयः AI ईशः, त्वष्टा विवस्वन्तम् इव, विशुद्धे नभसि स्थितम् इव सत्त्वे स्थितम्, तपोवीर्यमयेन धाम्ना युक्तम् तम् (अर्जुनम्) अजस्रम् शस्त्र-अभिघातैः उल्लिलेख।
English Summary AI Just as Tvashtri, the divine artisan, refines the sun by scraping it, Lord Shiva continuously refined Arjuna with the blows of his weapons. Arjuna, established in pure courage like the sun in a clear sky, was endowed with a splendor made of penance and valor.
सारांश AI तपोबल से युक्त और शुद्ध अंतःकरण वाले अर्जुन पर शिव ने शस्त्रों से वैसे ही प्रहार किए, जैसे शिल्पी त्वष्टा ने सूर्य को छीलकर और अधिक दीप्तिमान बनाया था।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) स्थितमिति ॥ विशुद्धे निर्मले नभसीव सत्त्वे सत्त्वगुणे स्थितं तपोवीर्यमयेन तपोवीर्याभ्यामागतेन धाम्ना तेजसा युक्तं तमर्जुनमीशस्त्वष्टा विश्वकर्मा विवस्वन्तं सूर्यमिवाजस्रं निरन्तरं शस्त्राभिघातैः शस्त्रकर्षणैरुल्लिलेख ततक्ष ॥
पदच्छेदः AI
स्थितम्स्थित (√स्था+क्त, २.१) situated
विशुद्धेविशुद्ध (वि√शुध्+क्त, ७.१) in the pure
नभसिनभस् (७.१) in the sky
इवइव like
सत्त्वेसत्त्व (७.१) in courage
धाम्नाधामन् (३.१) with splendor
तपोवीर्यमयेनतपस्वीर्यमय (३.१) made of penance and valor
युक्तम्युक्त (√युज्+क्त, २.१) endowed
शस्त्राभिघातैःशस्त्रअभिघात (३.३) by the blows of weapons
तम्तद् (२.१) him
अजस्रम्अजस्रम् continuously
ईशःईश (१.१) the Lord (Shiva)
त्वष्टात्वष्टृ (१.१) Tvashtri (the divine artisan)
विवस्वन्तम्विवस्वत् (२.१) the Sun
इवइव like
उल्लिलेखउल्लिलेख (उद्√लिख् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) scraped/refined
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
स्थि तं वि शु द्धे सी त्त्वे
धा म्ना पो वी र्य ये यु क्तम्
स्त्रा भि घा तै स्त स्र मी
स्त्व ष्टा वि स्व न्त मि वो ल्लि ले
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