तं शम्भुराक्षिप्तमहेषुजालं
लोहैः शरैर्मर्मसु निस्तुतोद ।
हृत्तोत्तरं तत्त्वविचारमध्ये
वक्तेव दोषैर्गुरुभिर्विपक्षम् ॥
तं शम्भुराक्षिप्तमहेषुजालं
लोहैः शरैर्मर्मसु निस्तुतोद ।
हृत्तोत्तरं तत्त्वविचारमध्ये
वक्तेव दोषैर्गुरुभिर्विपक्षम् ॥
लोहैः शरैर्मर्मसु निस्तुतोद ।
हृत्तोत्तरं तत्त्वविचारमध्ये
वक्तेव दोषैर्गुरुभिर्विपक्षम् ॥
अन्वयः
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शम्भुः आक्षिप्तमहेषुजालम् तम्, तत्त्वविचारमध्ये वक्ता हृत्तोत्तरम् विपक्षम् गुरुभिः दोषैः इव, लोहैः शरैः मर्मसु निस्तुतोद ।
English Summary
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Shambhu deeply pierced him (Arjuna), whose stock of arrows was exhausted, in his vital spots with iron arrows; just as a debater, in the midst of a philosophical discussion, silences an opponent with serious and fallacious arguments, leaving him without a reply.
सारांश
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जैसे कोई विद्वान ठोस तर्कों से विपक्षी को निरुत्तर कर देता है, वैसे ही शिव ने बाणहीन अर्जुन के मर्मस्थलों को अपने तीक्ष्ण लौह बाणों से बेधकर उन्हें पीड़ित कर दिया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
तमिति ॥ शंभुराक्षिप्तान्याहतानि महेषुजालानि यस्य तं मुनिं तत्त्वविचारमध्ये वादमध्ये हृतोत्तरं निरुत्तरीकृतं विपक्षं प्रतिवादिनं वक्ता वादी गुरुभिर्दोषैर्निग्रहस्थानैरिव लौहैर्लॊहमयैः शरैर्मर्मसु निस्तुतोद व्यथयामास ॥
पदच्छेदः
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| तम् | तद् (२.१) | him (Arjuna) |
| शम्भुः | शम्भु (१.१) | Shambhu (Shiva) |
| आक्षिप्तमहेषुजालम् | आक्षिप्त–महत्–इषु–जाल (२.१) | him whose great stock of arrows was exhausted |
| लोहैः | लोह (३.३) | with iron |
| शरैः | शर (३.३) | with arrows |
| मर्मसु | मर्मन् (७.३) | in the vital spots |
| निस्तुतोद | निस्तुतोद (निस्√तुद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | pierced deeply |
| हृत्तोत्तरम् | हृत–उत्तर (२.१) | him from whom the reply has been snatched |
| तत्त्वविचारमध्ये | तत्त्व–विचार–मध्य (७.१) | in the middle of a philosophical debate |
| वक्ता | वक्तृ (१.१) | a debater |
| इव | इव | like |
| दोषैः | दोष (३.३) | with fallacious arguments |
| गुरुभिः | गुरु (३.३) | with serious |
| विपक्षम् | विपक्ष (२.१) | an opponent |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तं | श | म्भु | रा | क्षि | प्त | म | हे | षु | जा | लं |
| लो | हैः | श | रै | र्म | र्म | सु | नि | स्तु | तो | द |
| हृ | त्तो | त्त | रं | त | त्त्व | वि | चा | र | म | ध्ये |
| व | क्ते | व | दो | षै | र्गु | रु | भि | र्वि | प | क्षम् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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