तेजः समाश्रित्य परैरहार्यं
निजं महन्मित्रमिवोरुधैर्यम् ।
आसादयन्नस्खलितस्वभावं
भीमे भुजालम्बमिवारिदुर्गे ॥
तेजः समाश्रित्य परैरहार्यं
निजं महन्मित्रमिवोरुधैर्यम् ।
आसादयन्नस्खलितस्वभावं
भीमे भुजालम्बमिवारिदुर्गे ॥
निजं महन्मित्रमिवोरुधैर्यम् ।
आसादयन्नस्खलितस्वभावं
भीमे भुजालम्बमिवारिदुर्गे ॥
अन्वयः
AI
परैः अहार्यम्, अस्खलितस्वभावम्, महत् मित्रम् इव निजम् उरुधैर्यम् तेजः समाश्रित्य, भीमे अरिदुर्गे भुजालम्बम् इव आसादयन्।
English Summary
AI
Relying on his own great and unwavering courage—which was like a great friend, unconquerable by others—he found support in it, just as one finds support in one's own arms when facing a formidable enemy fortress.
सारांश
AI
दूसरों के द्वारा न छीने जा सकने वाले अपने तेज और महान मित्र के समान धैर्य का आश्रय लेकर, अर्जुन ने अपनी भुजाओं के बल पर इस प्रकार भरोसा किया जैसे किसी अभेद्य दुर्ग का सहारा लिया हो।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
तेज इति ॥ पुनश्च । परैररिभिरहार्यमभेद्यं निजं स्वकीयं महत्तेजो वीर्यं मित्रमिव समाश्रित्य । अतएव भीमे भयानकेऽरिरेव दुर्गं तस्मिन्नरिदुर्गे शत्रुसंकटेऽस्खलितस्वभावमचलशीलमुरु महद्धैर्यं भुजालम्बमिव हस्तावष्टम्भमिवासादयन्प्राप्नुवन् । ईदृशे संकटेऽपि महावीरत्वाद्धैर्यमत्यजन्नित्यर्थः ॥
पदच्छेदः
AI
| तेजः | तेजस् (२.१) | spirit/courage |
| समाश्रित्य | समाश्रित्य (सम्+आ√श्रि+ल्यप्) | having relied on |
| परैः | पर (३.३) | by others |
| अहार्यम् | अहार्य (√हृ+ण्यत्, २.१) | unconquerable |
| निजम् | निज (२.१) | his own |
| महन्मित्रमिव | महत् (२.१)–मित्रम् (२.१)–इव | like a great friend |
| उरुधैर्यम् | उरु–धैर्य (२.१) | great courage |
| आसादयन् | आसादयत् (आ√सद्+णिच्+शतृ, १.१) | finding support |
| अस्खलितस्वभावम् | न–स्खलित (√स्खल्+क्त)–स्वभाव (२.१) | of an unwavering nature |
| भीमे | भीम (७.१) | in a formidable |
| भुजालम्बमिव | भुज–आलम्बम् (२.१)–इव | like the support of one's arms |
| अरिदुर्गे | अरि–दुर्ग (७.१) | in an enemy fortress |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | जः | स | मा | श्रि | त्य | प | रै | र | हा | र्यं |
| नि | जं | म | ह | न्मि | त्र | मि | वो | रु | धै | र्यम् |
| आ | सा | द | य | न्न | स्ख | लि | त | स्व | भा | वं |
| भी | मे | भु | जा | ल | म्ब | मि | वा | रि | दु | र्गे |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.