आघट्टयामास गतागताभ्यां
सावेगमग्राङ्गुलिरस्य तूणौ ।
विधेयमार्गे मतिरुत्सुकस्य
नयप्रयोगाविव गां जिगीषोः ॥
आघट्टयामास गतागताभ्यां
सावेगमग्राङ्गुलिरस्य तूणौ ।
विधेयमार्गे मतिरुत्सुकस्य
नयप्रयोगाविव गां जिगीषोः ॥
सावेगमग्राङ्गुलिरस्य तूणौ ।
विधेयमार्गे मतिरुत्सुकस्य
नयप्रयोगाविव गां जिगीषोः ॥
अन्वयः
AI
अस्य अग्राङ्गुलिः उत्सुकस्य गाम् जिगीषोः मतिः विधेयमार्गे नयप्रयोगौ इव, तूणौ गतागताभ्याम् सावेगम् आघट्टयामास ।
English Summary
AI
His fingertips hurriedly probed his two quivers back and forth, just as the mind of an eager king, desirous of conquering the earth, explores the two applications of policy (conciliation and gifts) in the path of action.
सारांश
AI
व्याकुल अर्जुन अपनी उंगलियों से खाली तरकशों को बार-बार वैसे ही टटोल रहे थे, जैसे विजय का इच्छुक राजा सफलता के लिए नीति और युक्तियों का बार-बार प्रयोग करता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
आघट्टयामासेति ॥ अस्य मुनेरग्रं चासावङ्गुलिश्चेत्यग्राङ्गुलिः ।
हस्ताग्राग्रहस्तयोर्गुणगुणिनोर्भेदाभेदात् इति वामनः। विधेयमार्गे कर्तव्यान्वेषण उत्सुकस्य प्रवृत्तस्य गां भुवं जिगीषोर्नायकस्य मतिर्बुद्धिर्नयः षाड्गुण्यं प्रयोग उपायस्तौ नयप्रयोगाविव तूणौ निषङ्गौ सावेगं ससंभ्रमम् । इष्टानिष्टागमाज्ञाने आवेगश्चित्तसंभ्रमः इति शाश्वतः। गतागताभ्यां यातायाताभ्यामावापोद्वापाभ्यां चाघट्टयामास । अन्यत्र तु वितर्कयामास । शरग्रहणाय पुनः पुनस्तूणयोः पाणिं व्यापारयामासेत्यर्थः ॥
पदच्छेदः
AI
| आघट्टयामास | आघट्टयामास (आ√घट्ट् +णिच्+आम् लिट् प्र.पु. एक.) | repeatedly probed |
| गतागताभ्याम् | गत–आगत (३.२) | by going and coming |
| सावेगम् | सावेगम् | hurriedly |
| अग्राङ्गुलिः | अग्र–अङ्गुलि (१.१) | the fingertip |
| अस्य | इदम् (६.१) | his (Arjuna's) |
| तूणौ | तूण (२.२) | the two quivers |
| विधेयमार्गे | विधेय–मार्ग (७.१) | in the path of what is to be done |
| मतिः | मति (१.१) | the mind |
| उत्सुकस्य | उत्सुक (६.१) | of an eager person |
| नयप्रयोगौ | नय–प्रयोग (२.२) | the two applications of policy |
| इव | इव | like |
| गाम् | गो (२.१) | the earth |
| जिगीषोः | जिगीषु (√जि+सन्+उ, ६.१) | of one who desires to conquer |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | घ | ट्ट | या | मा | स | ग | ता | ग | ता | भ्यां |
| सा | वे | ग | म | ग्रा | ङ्गु | लि | र | स्य | तू | णौ |
| वि | धे | य | मा | र्गे | म | ति | रु | त्सु | क | स्य |
| न | य | प्र | यो | गा | वि | व | गां | जि | गी | षोः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.