भूरिप्रभावेण रणाभियोगा-
त्प्रीतो विजिह्मश्च तदीयवृद्ध्या ।
स्पष्टोऽप्यविस्पष्टवपुःप्रकाशः
सर्पन्महाधूम इवाद्रिवह्निः ॥
भूरिप्रभावेण रणाभियोगा-
त्प्रीतो विजिह्मश्च तदीयवृद्ध्या ।
स्पष्टोऽप्यविस्पष्टवपुःप्रकाशः
सर्पन्महाधूम इवाद्रिवह्निः ॥
त्प्रीतो विजिह्मश्च तदीयवृद्ध्या ।
स्पष्टोऽप्यविस्पष्टवपुःप्रकाशः
सर्पन्महाधूम इवाद्रिवह्निः ॥
अन्वयः
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भूरिप्रभावेण रणअभियोगात् प्रीतः, तदीयवृद्ध्या विजिह्मः च, स्पष्टः अपि अविस्पष्टवपुःप्रकाशः, सर्पन्महाधूमः अद्रिवह्निः इव आसीत्।
English Summary
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He was pleased by the challenge of the mighty battle, yet displeased by his opponent's growing success. Though manifest, his form's radiance was obscured, like a mountain fire spreading with great smoke.
सारांश
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युद्ध के कारण अत्यधिक प्रभावशाली और अर्जुन की उन्नति से प्रसन्न किन्तु कुटिल दिखाई देने वाले शिव, पर्वत की अग्नि के समान भारी धुएं से व्याप्त होकर स्पष्ट होते हुए भी अस्पष्ट रूप वाले जान पड़ रहे थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
भूरीति ॥ पुनश्च । भूरिप्रभावेण महानुभावेन सह रणाभियोगाद्युद्धलाभात्प्रीतस्तदीयवृद्ध्या शत्रुवृद्ध्या विजिह्यो विच्छायश्च तथा स्पष्टो दीप्त्या प्रज्वलन्नप्यविस्पष्टो वपुःप्रकाशो यस्य सः। कुतः। सर्पन्प्रसरन्महान्धूमो यस्य सोऽद्रिवह्निरिव स्थितः ॥
पदच्छेदः
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| भूरिप्रभावेण | भूरि–प्रभाव (३.१) | by the mighty one |
| रणाभियोगात् | रण–अभियोग (५.१) | by the challenge of battle |
| प्रीतः | प्रीत (√प्री+क्त, १.१) | pleased |
| विजिह्मश्च | विजिह्म (१.१)–च | and displeased |
| तदीयवृद्ध्या | तदीय–वृद्धि (३.१) | by his (the opponent's) success |
| स्पष्टोऽपि | स्पष्ट (√स्पश्+क्त, १.१)–अपि | though manifest |
| अविस्पष्टवपुःप्रकाशः | अविस्पष्ट–वपुस्–प्रकाश (१.१) | whose bodily radiance was obscured |
| सर्पन्महाधूमः | सर्पत् (√सृप्+शतृ)–महा–धूम (१.१) | a great, spreading smoke |
| इव | इव | like |
| अद्रिवह्निः | अद्रि–वह्नि (१.१) | a mountain fire |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भू | रि | प्र | भा | वे | ण | र | णा | भि | यो | गा |
| त्प्री | तो | वि | जि | ह्म | श्च | त | दी | य | वृ | द्ध्या |
| स्प | ष्टो | ऽप्य | वि | स्प | ष्ट | व | पुः | प्र | का | शः |
| स | र्प | न्म | हा | धू | म | इ | वा | द्रि | व | ह्निः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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