प्रसेदिवांसं न तमाप कोपः
कुतः परस्मिन्पुरुषे विकारः ।
आकारवैषम्यमिदं च भेजे
दुर्लक्ष्यचिह्ना महतां हि वृत्तिः ॥
प्रसेदिवांसं न तमाप कोपः
कुतः परस्मिन्पुरुषे विकारः ।
आकारवैषम्यमिदं च भेजे
दुर्लक्ष्यचिह्ना महतां हि वृत्तिः ॥
कुतः परस्मिन्पुरुषे विकारः ।
आकारवैषम्यमिदं च भेजे
दुर्लक्ष्यचिह्ना महतां हि वृत्तिः ॥
अन्वयः
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कोपः प्रसेदिवांसम् तम् न आप । परस्मिन् पुरुषे विकारः कुतः (भवति)? (सः) इदम् आकारवैषम्यम् च भेजे । हि महताम् वृत्तिः दुर्लक्ष्यचिह्ना (भवति) ।
English Summary
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Anger did not touch him (Shiva) who was serene. How can there be agitation in the Supreme Being? Yet, he assumed a change in appearance. Indeed, the conduct of the great has signs that are difficult to perceive.
सारांश
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परम पुरुष शिव शांत थे और उनमें क्रोध जैसा विकार संभव नहीं था, फिर भी उन्होंने युद्धोचित विकराल रूप धारण किया; क्योंकि महापुरुषों का आचरण और स्वभाव समझना अत्यंत कठिन होता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
प्रसेदिवांसमिति ॥प्रसेदिवांसमर्जुनं प्रति प्रसन्नचित्तं तं देवं कोपो नाप न प्राप। तत्राप्यनुग्रहं ययाविति भावः । तत्र हेतुः-परस्मिन्पुरुषे परात्मनि देवे । स्वतो निर्विकार इत्यर्थः । विकार: कोपरूपः कुतः। न कुतश्चिदित्यर्थः । ननु तस्य निर्विकारस्य कथं बहिराकारभेदः कारणाभावादिति चेत्तन्न विद्म इत्याह-इदं पूर्वोत्तमाकारवैषम्यं च भेजे । किंतु केनापि कारणेन न कुप्यतीत्यर्थः । ननु निर्विकारे कुत आकारभेदस्तत्राहमहतां वृत्तिश्चेष्टा दुर्लक्ष्यचिह्ना दुर्ग्रहहेतुका हि ॥ वैषम्यमेवाह
पदच्छेदः
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| प्रसेदिवांसम् | प्रसेदिवस् (प्र√सद्+क्वसु, २.१) | the one who was calm/pleased |
| न | न | not |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| आप | आप (√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reached |
| कोपः | कोप (१.१) | anger |
| कुतः | कुतः | from where/how |
| परस्मिन् | पर (७.१) | in the supreme |
| पुरुषे | पुरुष (७.१) | in the person |
| विकारः | विकार (१.१) | agitation/change |
| आकारवैषम्यम् | आकार–वैषम्य (२.१) | change in appearance |
| इदम् | इदम् (२.१) | this |
| च | च | and |
| भेजे | भेजे (√भज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | assumed |
| दुर्लक्ष्यचिह्ना | दुर्लक्ष्य–चिह्न (१.१) | whose signs are difficult to perceive |
| महताम् | महत् (६.३) | of the great |
| हि | हि | indeed |
| वृत्तिः | वृत्ति (१.१) | behavior |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | से | दि | वां | सं | न | त | मा | प | को | पः |
| कु | तः | प | र | स्मि | न्पु | रु | षे | वि | का | रः |
| आ | का | र | वै | ष | म्य | मि | दं | च | भे | जे |
| दु | र्ल | क्ष्य | चि | ह्ना | म | ह | तां | हि | वृ | त्तिः |
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