अन्वयः
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अथ तेन गणाधिपानाम् क्षोभेण ईश्वरस्य आकृतिः भेदम् ययौ, महाह्रदानाम् तरङ्गकम्पेन छायामयस्य दिनस्य कर्तुः आकृतिः इव।
English Summary
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Then, due to that agitation of the Gana chiefs, the form of Ishvara (Shiva) appeared fragmented, just as the reflected image of the sun, the maker of the day, appears fragmented in great lakes due to the trembling of the waves.
सारांश
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प्रमथगणों के क्षोभ से शिव का स्वरूप वैसा ही विभाजित सा दिखा, जैसे लहरों की हलचल से किसी विशाल सरोवर में सूर्य का प्रतिबिम्ब काँपता हुआ प्रतीत होता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
क्षोभेणेति ॥ अथ गणाधिपानां संबन्धिना तेन क्षोभेण कम्पेनेश्वरस्याकृतिराकारो मूर्तिर्महाहृदानां तरंगकम्पेन छायामयस्य प्रतिबिम्बरूपस्य दिनस्य कर्तुर्दिवाकरस्याकृतिरिव भेदं विकारं ययौ प्राप । स्वयं निर्विकारोऽपि प्रतिमासूर्यवत्परसंसर्गात्तथा प्रतीयत इत्यर्थः ॥ यदि देवोऽपि विकृतस्तर्हि कोपः किं न कृतः। तत्राह
पदच्छेदः
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| क्षोभेण | क्षोभ (३.१) | Due to the agitation |
| तेनाथ | तद् (३.१)–अथ | by that, then |
| गणाधिपानां | गण–अधिप (६.३) | of the Gana chiefs |
| भेदं | भेद (२.१) | fragmentation |
| ययौ | ययौ (√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | went to |
| आकृतिरीश्वरस्य | आकृतिः (१.१)–ईश्वर (६.१) | the form of Ishvara (Shiva) |
| तरङ्गकम्पेन | तरङ्ग–कम्प (३.१) | by the trembling of the waves |
| महाह्रदानां | महा–ह्रद (६.३) | of great lakes |
| छायामयस्येव | छायामय (६.१)–इव | like of the reflected image |
| दिनस्य | दिन (६.१) | of the day |
| कर्तुः | कर्तृ (६.१) | of the maker (the sun) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्षो | भे | ण | ते | ना | थ | ग | णा | धि | पा | नां |
| भे | दं | य | य | वा | कृ | ति | री | श्व | र | स्य |
| त | र | ङ्ग | क | म्पे | न | म | हा | ह्र | दा | नां |
| छा | या | म | य | स्ये | व | दि | न | स्य | क | र्तुः |
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