वितन्वतस्तस्य शरान्धकारं
त्रस्तानि सैन्यानि रवं निशेमुः ।
प्रवर्षतः संततवेपथूनि
क्षपाघनस्येव गवां कुलानि ॥
वितन्वतस्तस्य शरान्धकारं
त्रस्तानि सैन्यानि रवं निशेमुः ।
प्रवर्षतः संततवेपथूनि
क्षपाघनस्येव गवां कुलानि ॥
त्रस्तानि सैन्यानि रवं निशेमुः ।
प्रवर्षतः संततवेपथूनि
क्षपाघनस्येव गवां कुलानि ॥
अन्वयः
AI
तस्य शरअन्धकारम् वितन्वतः त्रस्तानि सैन्यानि रवम् निशेमुः, प्रवर्षतः क्षपाघनस्य संततवेपथूनि गवां कुलानि इव।
English Summary
AI
As he spread a darkness of arrows, the terrified armies heard a great noise, just as herds of cattle, trembling continuously, hear the sound of a night-cloud as it pours down rain.
सारांश
AI
अर्जुन द्वारा फैलाए गए बाणों के अंधकार में भयभीत सेनाओं ने केवल धनुष की टंकार सुनी, जैसे वर्षा ऋतु की रात में बादलों के गरजने पर कांपते हुए गायों के झुंड केवल गर्जना सुनते हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
वितन्वत इति ॥ त्रस्तानि सैन्यानि संततवेपथूनि निरन्तरकम्पानि गवां कुलानि वृन्दानि प्रवर्षतो वृष्टिं कुर्वतः क्षपाघनस्य रात्रिमेघस्येव शरैर्योऽन्धकारस्तं वितन्वतो विस्तारयतस्तस्य मुनेः संबन्धिनं रवं शरवर्षघोषं निशेमुःशुश्रुवु:। न तु किंचिद्ददृशुः। चेष्टा तु दूरापास्तेति भावः ॥
पदच्छेदः
AI
| वितन्वतस्तस्य | वितन्वत् (वि√तन्+शतृ, ६.१)–तस्य (६.१) | of him spreading |
| शरान्धकारं | शर–अन्धकार (२.१) | a darkness of arrows |
| त्रस्तानि | त्रस्त (√त्रस्+क्त, १.३) | terrified |
| सैन्यानि | सैन्य (१.३) | the armies |
| रवं | रव (२.१) | a noise |
| निशेमुः | निशेमुः (नि√शम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | heard |
| प्रवर्षतः | प्रवर्षत् (प्र√वृष्+शतृ, ६.१) | of the one pouring rain |
| संततवेपथूनि | संतत (सम्√तन्+क्त)–वेपथु (१.३) | trembling continuously |
| क्षपाघनस्येव | क्षपा–घन (६.१)–इव | like of a night-cloud |
| गवां | गो (६.३) | of cattle |
| कुलानि | कुल (१.३) | herds |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | त | न्व | त | स्त | स्य | श | रा | न्ध | का | रं |
| त्र | स्ता | नि | सै | न्या | नि | र | वं | नि | शे | मुः |
| प्र | व | र्ष | तः | सं | त | त | वे | प | थू | नि |
| क्ष | पा | घ | न | स्ये | व | ग | वां | कु | ला | नि |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.