मुनेर्विचित्रैरिषुभिः स भूया-
न्निन्ये वशं भूतपतेर्बलौघः ।
सहात्मलाभेन समुत्पतद्भि-
र्जातिस्वभावैरिव जीवलोकः ॥
मुनेर्विचित्रैरिषुभिः स भूया-
न्निन्ये वशं भूतपतेर्बलौघः ।
सहात्मलाभेन समुत्पतद्भि-
र्जातिस्वभावैरिव जीवलोकः ॥
न्निन्ये वशं भूतपतेर्बलौघः ।
सहात्मलाभेन समुत्पतद्भि-
र्जातिस्वभावैरिव जीवलोकः ॥
अन्वयः
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सः भूयान् भूतपतेः बलौघः मुनेः विचित्रैः इषुभिः वशम् निन्ये, जीवलोकः आत्मलाभेन सह समुत्पतद्भिः जातिस्वभावैः इव।
English Summary
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That vast army of the Lord of Beings (Shiva) was brought under control by the sage's (Arjuna's) varied arrows, just as the world of living beings is controlled by innate dispositions that arise along with their very existence.
सारांश
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मुनि अर्जुन ने अपने विचित्र बाणों से शिव की सेना को उसी प्रकार अपने वश में कर लिया, जैसे जन्म के साथ उत्पन्न होने वाले स्वभाव और वृत्तियां समस्त जीव जगत को अपने नियंत्रण में रखती हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
मुनेरिति ॥मुनर्विचित्रैरिषुभिः स भूयानसंख्यो भूतपतेर्बलौघ आत्मलाभेन जन्मना सह समुत्पतद्भिराविर्भवद्भिः। आजन्मसिद्धैरित्यर्थः । जातयो गोत्वमनुष्यत्वादयः । स्वभावा जातिनियता धर्मास्तैर्जातिस्वभावैर्जीवलोकः प्राणिजातमिव वशं निन्ये नीतः। कर्मणि लिट् । प्राणिनो जातिधर्मानिव गणा मुनिशरान्नातिक्रमितुं शेकुरित्यर्थः॥
पदच्छेदः
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| मुनेर्विचित्रैरिषुभिः | मुनि (६.१)–विचित्रैः (३.३)–इषुभिः (३.३) | by the sage's (Arjuna's) varied arrows |
| स | तद् (१.१) | that |
| भूयान् | भूयस् (१.१) | vast |
| निन्ये | निन्ये (√नी भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was brought |
| वशं | वश (२.१) | under control |
| भूतपतेर्बलौघः | भूतपति (६.१)–बलौघः (१.१) | the army of the Lord of Beings |
| सहात्मलाभेन | सह–आत्मलाभ (३.१) | along with their very existence |
| समुत्पतद्भिः | समुत्पतत् (सम्+उद्√पत्+शतृ, ३.३) | by those that arise |
| जातिस्वभावैरिव | जाति–स्वभावैः (३.३)–इव | like by innate dispositions |
| जीवलोकः | जीव–लोक (१.१) | the world of living beings |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मु | ने | र्वि | चि | त्रै | रि | षु | भिः | स | भू | या |
| न्नि | न्ये | व | शं | भू | त | प | ते | र्ब | लौ | घः |
| स | हा | त्म | ला | भे | न | स | मु | त्प | त | द्भि |
| र्जा | ति | स्व | भा | वै | रि | व | जी | व | लो | कः |
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