अन्वयः
AI
शराणाम् शक्तिः शितिकण्ठकाये, अभिनिविष्टबुद्धौ सत्वादिता इव, विपक्षपाते गुणाभ्यसूया इव, अगोचरे वाक् इव च, उपरेमे।
English Summary
AI
The power of the arrows ceased upon Shiva's body, just as the speech of a good person ceases before a prejudiced mind, as envy of virtues ceases in one partial to the opposition, and as speech ceases when its object is beyond reach.
सारांश
AI
शिव के शरीर पर पहुँचकर अर्जुन के बाणों की शक्ति उसी प्रकार निष्फल हो गई, जैसे हठी बुद्धि में सत्य वचन, शत्रु के पक्ष में गुणों के प्रति ईर्ष्या, अथवा अगम्य विषय में वाणी रुक जाती है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
सद्वादितेति ॥ अभिनिविष्टा शास्त्रनिश्चिता बुद्धिर्यस्य स तस्मिन्नभिनिविष्टबुद्धौशास्त्रनिष्टितमतौ विषये सद्वादिता प्रामाणिकार्थसमर्थकतेव। न हि सम्यगभ्यस्तशास्त्रं प्रति सद्वाद्यपि शक्नोतीति व्याचक्षते केचित्। अन्ये त्वभिनिविष्टबुद्धावाग्रहाविष्टचित्ते विषये सद्वादिता हितोपदेष्टुत्वमिव । न ह्याग्रही हितं गृह्णातीति भावः। विपक्षपाते वीतरागे विषये गुणाभ्यसूया गुणासहिष्णुतेव ।स हि समदर्शी द्विपन्तमपि न द्वेष्टीति भावः।अगोचरेऽवाङ्मनसगोचरे ब्रह्मणि वागिव ।
यतो वाचो निवर्तन्ते अप्राप्यमनसा सह इति श्रुतेरिति भावः। शराणां शक्तिः शितिकण्टकाये शिवशरीरे विषये उपरेम उपरता । तस्याक्षोभ्यमहिमत्वादिति भावः । विभाषाकर्मकात् इत्यस्य वैकल्पिकत्वात्पक्ष आत्मनेपदम् । मालोपमा ।
पदच्छेदः
AI
| सद्वादितेव | सत्–वादिता (१.१)–इव | like the speech of a good person |
| अभिनिविष्टबुद्धौ | अभिनिविष्ट (अभि+नि√विश्+क्त)–बुद्धि (७.१) | on a prejudiced mind |
| गुणाभ्यसूयेव | गुण–अभ्यसूया (१.१)–इव | like envy of virtues |
| विपक्षपाते | विपक्ष–पात (७.१) | on one partial to the opposition |
| अगोचरे | अगोचर (७.१) | on an unreachable object |
| वागिव | वाच् (१.१)–इव | like speech |
| च | च | and |
| उपरेमे | उपरेमे (उप√रम् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | ceased |
| शक्तिः | शक्ति (१.१) | the power |
| शराणां | शर (६.३) | of the arrows |
| शितिकण्ठकाये | शिति–कण्ठ–काय (७.१) | on the body of Shiva |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | द्वा | दि | ते | वा | भि | नि | वि | ष्ट | बु | द्धौ |
| गु | णा | भ्य | सू | ये | व | वि | प | क्ष | पा | ते |
| अ | गो | च | रे | वा | गि | व | चो | प | रे | मे |
| श | क्तिः | श | रा | णां | शि | ति | क | ण्ठ | का | ये |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.