अस्मिन्यशःपौरुषलोलुपाना-
मरातिभिः प्रत्युरसं क्षतानाम् ।
मूर्छान्तरायं मुहुरुच्छिनत्ति
नासारशीतं करिशीकराम्भः ॥
अस्मिन्यशःपौरुषलोलुपाना-
मरातिभिः प्रत्युरसं क्षतानाम् ।
मूर्छान्तरायं मुहुरुच्छिनत्ति
नासारशीतं करिशीकराम्भः ॥
मरातिभिः प्रत्युरसं क्षतानाम् ।
मूर्छान्तरायं मुहुरुच्छिनत्ति
नासारशीतं करिशीकराम्भः ॥
अन्वयः
AI
अस्मिन् यशःपौरुषलोलुपानाम् अरातिभिः प्रत्युरसं क्षतानाम् मूर्छान्तरायम् आसारशीतं करिशीकराम्भः मुहुः न उच्छिनत्ति ।
English Summary
AI
In this battle, the cool water sprayed from elephants' trunks does not repeatedly revive warriors—those greedy for fame and valor—who are wounded on the chest by their enemies and are fainting. (Arjuna notes the absence of this specific battlefield scene).
सारांश
AI
यश और पौरुष के अभिलाषी जो योद्धा शत्रुओं द्वारा घायल हुए हैं, हाथियों की सूँड से निकले शीतल जल के कण उनकी मूर्च्छा को बार-बार दूर कर रहे हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अस्मिन्निति ॥ अस्मिन् रणे यशःपौरुषयोर्लोलुपानां गृध्नूनामतएवारातिभिः प्रत्युरसमुरसि ।
प्रतेरुरसः सप्तमीस्थात् (अष्टाध्यायी ५.४.८२ ) इति समासान्तः । क्षतानां विद्धानां संबन्धिनं मूर्च्छैवान्तरायो रणविघ्नस्तमासारशीतं वर्षधाराशीतलम् । धारासंपात आसारः इत्यमरः (अमरकोशः १.३.१३ ) । करिणां शीकर एवाम्भः कर्तॄ मुहुर्नोच्छिनत्ति न नाशयति ॥ असृङ्गदीनामुपचीयमानैर्विदा रयद्भिः पदवीं ध्वजिन्याः। उच्छ्रायमायान्ति न शोणितौघैः पङ्कैरिवाश्यानघनैस्तटानि
पदच्छेदः
AI
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | in this (battle) |
| यशःपौरुषलोलुपानाम् | यशस्–पौरुष–लोलुप (६.३) | of those greedy for fame and valor |
| अरातिभिः | अराति (३.३) | by enemies |
| प्रत्युरसम् | प्रत्युरसम् (२.१) | on the chest |
| क्षतानाम् | क्षत (√क्षन्+क्त, ६.३) | of the wounded |
| मूर्छान्तरायम् | मूर्छा–अन्तराय (२.१) | the interruption of fainting spells |
| मुहुः | मुहुः | repeatedly |
| उच्छिनत्ति | उच्छिनत्ति (उद्√छिद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | cuts off / removes |
| न | न | not |
| आसारशीतम् | आसार–शीत (१.१) | cool from the spray |
| करिशीकराम्भः | करि–शीकर–अम्भस् (१.१) | the water from the trunks of elephants |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्मि | न्य | शः | पौ | रु | ष | लो | लु | पा | ना |
| म | रा | ति | भिः | प्र | त्यु | र | सं | क्ष | ता | नाम् |
| मू | र्छा | न्त | रा | यं | मु | हु | रु | च्छि | न | त्ति |
| ना | सा | र | शी | तं | क | रि | शी | क | रा | म्भः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.