उपैत्यनन्तद्युतिरप्यसंशयं
विभिन्नमूलोऽनुदयाय संक्षयम् ।
तथा हि तोयौघविभिन्नसंहतिः
स हव्यवाहः प्रययौ पराभवम् ॥

अन्वयः AI अनन्त-द्युतिः अपि विभिन्न-मूलः (सन्) अनुदयाय संक्षयम् असंशयम् उपैति। तथा हि तोय-ओघ-विभिन्न-संहतिः सः हव्यवाहः पराभवम् प्रययौ।
English Summary AI Indeed, even one of infinite splendor, if their foundation is destroyed, undoubtedly goes to ruin, never to rise again. Thus, the fire, its cohesive form shattered by the flood of water, met its defeat.
सारांश AI असीमित चमक वाला भी यदि मूल से छिन्न-भिन्न हो जाए तो वह निश्चित रूप से पुनरुत्थान रहित विनाश को प्राप्त होता है। जैसे जल की धारा द्वारा समूह के बिखर जाने पर अग्नि पराजय को प्राप्त हुई।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) उपैतीति । अनन्तद्युतिर्महातेजा अपि विभिन्नमूलो नष्टमूलोऽसंशयं यथा तथानुदयाय पुनरनुत्थानाय संक्षयं नाशमुपैति । तथा हि । तोयौघैर्विभिन्ना संहतिः संघातो यस्य स तथोक्तः स हव्यवाहोऽग्निः पराभवं नाशं प्रययौ । विशेषेण सामान्यसमर्थनरूपोऽर्थान्तरन्यासः ॥
पदच्छेदः AI
उपैतिउपैति (उप√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) goes to
अनन्तद्युतिःअनन्तद्युति (१.१) one of infinite splendor
अपिअपि even
असंशयम्असंशयम् undoubtedly
विभिन्नमूलःविभिन्नमूल (१.१) one whose foundation is destroyed
अनुदयायअन्उदय (४.१) for non-rising (never to rise again)
संक्षयम्संक्षय (२.१) ruin
तथातथा Thus
हिहि indeed
तोयौघविभिन्नसंहतिःतोयओघविभिन्नसंहति (१.१) whose cohesive form was shattered by the flood of water
सःतद् (१.१) that
हव्यवाहःहव्यवाह (१.१) the fire (carrier of oblations)
प्रययौप्रययौ (प्र√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) met
पराभवम्पराभव (२.१) defeat
छन्दः वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
पै त्य न्त द्यु ति प्य सं यं
वि भि न्न मू लो ऽनु या सं क्ष यम्
था हि तो यौ वि भि न्न सं तिः
व्य वा हः प्र यौ रा वम्
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