पराहतध्वस्तशिखे शिखावतो
वपुष्यधिक्षिप्तसमिद्धतेजसि ।
कृतास्पदास्तप्त इवायसि ध्वनिं
पयोनिपाताः प्रथमे वितेनिरे ॥

अन्वयः AI प्रथमे पयः-निपाताः पराहत-ध्वस्त-शिखे, अधिक्षिप्त-समिद्ध-तेजसि शिखावतः वपुषि कृत-आस्पदाः (सन्तः), तप्ते अयसि इव ध्वनिम् वितेनिरे।
English Summary AI The first downpours of water, finding their place on the body of the fire—whose flames were struck down and destroyed and whose blazing energy was surpassed—produced a sound like that of water on hot iron.
सारांश AI धधकती अग्नि पर गिरने वाली जल की पहली बूंदों ने तप्त लोहे पर गिरने वाले पानी जैसी तीव्र ध्वनि की और अग्नि के प्रचंड तेज को दबाना शुरू कर दिया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) पराहतेति ॥ पराहता आसाराभिहता अतो ध्वस्ता निर्वापिताः शिखा ज्वाला यस्य तस्मिन्पराहतध्वस्तशिखे । अधिक्षिप्तं प्रहारितं नाशितम् । ताडितमिति यावत् । अतः समिद्धं झटिति प्रदीप्तं तेजो यस्य तस्मिञ्छिखावतोऽग्नेर्वपुषि स्वरूपे । तप्तेऽयसि लोह इव कृतास्पदाः कृतस्थियंयः । आस्पदं प्रतिष्ठायाम् (अष्टाध्यायी ६.१.१४६ ) इति निपातः। प्रथमे पयोनिपाता जलपाता ध्वनिं वितेनिरे विस्तारयामासुः ॥
पदच्छेदः AI
पराह्तध्वस्तशिखेपराहत (परा√हन्+क्त)ध्वस्तशिखा (७.१) on which the flames were struck down and destroyed
शिखावतःशिखावत् (६.१) of the fire
वपुषिवपुस् (७.१) on the body
अधिक्षिप्तसमिद्धतेजसिअधिक्षिप्त (अधि√क्षिप्+क्त)समिद्ध (सम्√इध्+क्त)तेजस् (७.१) on which the blazing energy was surpassed
कृतास्पदाःकृतआस्पद (१.३) having found their place
तप्तेतप्त (√तप्+क्त, ७.१) on hot
इवइव like
अयसिअयस् (७.१) iron
ध्वनिम्ध्वनि (२.१) a sound
पयोनिपाताःपयस्निपात (१.३) the downpours of water
प्रथमेप्रथम (१.३) the first
वितेनिरेवितेनिरे (वि√तन् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) produced
छन्दः वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
रा ध्व स्त शि खे शि खा तो
पु ष्य धि क्षि प्त मि द्ध ते सि
कृ ता स्प दा स्त प्त वा सि ध्व निं
यो नि पा ताः प्र मे वि ते नि रे
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