लिलिक्षतीव क्षयकालरौद्रे
लोकं विलोलार्चिषि रोहिताश्वे ।
पिनाकिना हूतमहाम्बुवाह-
मस्त्रं पुनः पाशभृतः प्रणिन्ये ॥
लिलिक्षतीव क्षयकालरौद्रे
लोकं विलोलार्चिषि रोहिताश्वे ।
पिनाकिना हूतमहाम्बुवाह-
मस्त्रं पुनः पाशभृतः प्रणिन्ये ॥
लोकं विलोलार्चिषि रोहिताश्वे ।
पिनाकिना हूतमहाम्बुवाह-
मस्त्रं पुनः पाशभृतः प्रणिन्ये ॥
अन्वयः
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क्षय-काल-रौद्रे, विलोल-अर्चिषि रोहिताश्वे लोकम् लिलिक्षति इव (सति), पिनाकिना पाशभृतः हूत-महा-अम्बु-वाहम् अस्त्रम् पुनः प्रणिन्ये।
English Summary
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As the fire, terrible as at the time of universal destruction and with flickering flames, seemed about to lick up the world, the wielder of the Pinaka (Shiva) again employed the weapon of the Noose-holder (Varuna), which summons great water-bearing clouds.
सारांश
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प्रलयकाल की तरह संसार को भस्म करने को उद्यत अग्नि को देखकर शिव ने मेघों का आह्वान किया और अर्जुन ने पुनः वरुण अस्त्र का संधान किया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
लिलिक्षतीति ॥ क्षयकालरौद्रे कल्पान्तकालवद्भयावहे विलोलार्चिषि चलज्ज्वाले रोहिताश्वे ज्वलने ।
रोहिताश्वो वायुसखः इत्यमरः (अमरकोशः १.१.६६ ) । लोकं लिलिक्षति लेढुमिच्छति जिघत्सति सतीव । लिहेः सन्नन्ताच्छतृप्रत्ययः । पिनाकिना पुनर्हृता आहूता आकारिता महाम्बुवाहा येन तत्पाशभृतो वरुणस्यास्त्रं प्रणिन्ये प्रयुक्तम् ॥
पदच्छेदः
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| लिलिक्षति | लिलिक्षति (√लिह् +सन् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is about to lick up |
| इव | इव | as if |
| क्षयकालरौद्रे | क्षय–काल–रौद्र (७.१) | in the one terrible as at the time of destruction |
| लोकम् | लोक (२.१) | the world |
| विलोलाचिषि | विलोला–अर्चिस् (७.१) | in the one with flickering flames |
| रोहिताश्वे | रोहिताश्व (७.१) | in the fire |
| पिनाकिना | पिनाकिन् (३.१) | by the wielder of Pinaka (Shiva) |
| हूतमहाम्बुवाहम् | हूत–महत्–अम्बु–वाह (२.१) | which summons great water-bearing clouds |
| अस्त्रम् | अस्त्र (२.१) | the weapon |
| पुनः | पुनर् | again |
| पाशभृतः | पाश–भृत् (६.१) | of the Noose-holder (Varuna) |
| प्रणिन्ये | प्रणिन्ये (प्र+नि√नी कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | employed |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| लि | लि | क्ष | ती | व | क्ष | य | का | ल | रौ | द्रे |
| लो | कं | वि | लो | ला | र्चि | षि | रो | हि | ता | श्वे |
| पि | ना | कि | ना | हू | त | म | हा | म्बु | वा | ह |
| म | स्त्रं | पु | नः | पा | श | भृ | तः | प्र | णि | न्ये |
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