साफल्यमस्त्रे रिपुपौरुषस्य
कृत्वा गते भाग्य इवापवर्गम् ।
अनिन्धनस्य प्रसभं समन्युः
समाददेऽस्त्रं ज्वलनस्य जिष्णुः ॥
साफल्यमस्त्रे रिपुपौरुषस्य
कृत्वा गते भाग्य इवापवर्गम् ।
अनिन्धनस्य प्रसभं समन्युः
समाददेऽस्त्रं ज्वलनस्य जिष्णुः ॥
कृत्वा गते भाग्य इवापवर्गम् ।
अनिन्धनस्य प्रसभं समन्युः
समाददेऽस्त्रं ज्वलनस्य जिष्णुः ॥
अन्वयः
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अस्त्रे रिपु-पौरुषस्य साफल्यम् कृत्वा, भाग्य इव अपवर्गम् गते (सति), समन्युः जिष्णुः अनिन्धनस्य ज्वलनस्य अस्त्रम् प्रसभम् समाददे।
English Summary
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When the serpent-weapon, having successfully countered the enemy's prowess, had reached its conclusion like a stroke of good fortune, the wrathful Arjuna forcibly took up the fire-weapon, which requires no fuel.
सारांश
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शत्रु के प्रभाव से जब अपना अस्त्र निष्फल हो गया, तब भाग्य के साथ न देने पर जैसे पुरुष का उत्साह बढ़ता है, वैसे ही अर्जुन ने क्रोधपूर्वक प्रलयंकारी आग्नेयास्त्र धारण किया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
साफल्यमिति ॥ अस्त्रे सर्पास्त्रे । भाग्ये प्राम्भवीये शुभे कर्मणीव । रिपुपौरुषस्य रिपु पराक्रमस्य साफल्यं कृत्वापवर्गमवसानं समाप्तिं गते सति । स्वनिवृत्त्या परसाफल्यात्सफलीकरणोपचारः।समन्युः सक्रोधो जिष्णुरर्जुनोऽनिन्धनस्येन्धनं विनैवोत्पादितस्य ज्वलनस्य ज्वलनप्रदीपकमस्त्रमाग्नेयास्त्रं प्रसभं शीघ्रं समाददे जग्राह ॥
पदच्छेदः
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| साफल्यम् | साफल्य (२.१) | success |
| अस्त्रे | अस्त्र (७.१) | the weapon (Garudastra) |
| रिपुपौरुषस्य | रिपु–पौरुष (६.१) | of the enemy's prowess |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having achieved |
| गते | गत (√गम्+क्त, ७.१) | having gone |
| भाग्य | भाग्य (१.१) | a stroke of good fortune |
| इव | इव | like |
| अपवर्गम् | अपवर्ग (२.१) | to its conclusion |
| अनिन्धनस्य | अन्–इन्धन (६.१) | which requires no fuel |
| प्रसभम् | प्रसभम् | forcibly |
| समन्युः | स–मन्यु (१.१) | wrathful |
| समाददे | समाददे (सम्+आ√दा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | took up |
| अस्त्रम् | अस्त्र (२.१) | the weapon |
| ज्वलनस्य | ज्वलन (६.१) | of fire |
| जिष्णुः | जिष्णु (१.१) | Jishnu (Arjuna) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | फ | ल्य | म | स्त्रे | रि | पु | पौ | रु | ष | स्य |
| कृ | त्वा | ग | ते | भा | ग्य | इ | वा | प | व | र्गम् |
| अ | नि | न्ध | न | स्य | प्र | स | भं | स | म | न्युः |
| स | मा | द | दे | ऽस्त्रं | ज्व | ल | न | स्य | जि | ष्णुः |
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