अन्वयः
AI
सः भोग-संघः उग्र-धाम्नाम् विनता-सुतानाम् सैन्येन शमम् निन्ये, महा-अध्वरे विधि-अपचार-दोषः महा-उदयेन कर्म-अन्तरेण इव।
English Summary
AI
That host of serpents was brought to pacification by the army of the sons of Vinata of terrible splendor, just as in a great sacrifice, a flaw from a procedural error is nullified by another highly effective ritual act.
सारांश
AI
गरुड़ों की सेना ने उन भयंकर सर्पों को वैसे ही शांत कर दिया, जैसे किसी महान यज्ञ का निर्दोष अनुष्ठान पूर्व के यज्ञ में हुई त्रुटियों के दोष को समाप्त कर देता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
स इति ॥ स भोगिसंघः सर्पसमूह उग्रधाम्नां तेजस्विनां विनतासुतानां तार्क्ष्याणां सैन्येन महाध्वरे महाक्रतौ विध्यपचारदोषः कर्मस्खलनदोषो महोदयेन महासामर्थ्येनाथवा महता फलेन । तन्मूलेन प्रकृतक्रियासिद्धेरिति । कर्मान्तरेण प्रायश्चित्तेनेव शमं शान्तिं निन्ये प्रापितः ॥
पदच्छेदः
AI
| सः | तद् (१.१) | That |
| भोगसंघः | भोगिन्–संघ (१.१) | host of serpents |
| शमम् | शम (२.१) | to pacification |
| उग्रधाम्नाम् | उग्र–धामन् (६.३) | of terrible splendor |
| सैन्येन | सैन्य (३.१) | by the army |
| निन्ये | निन्ये (नि√नी भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was brought |
| विनतासुतानाम् | विनता–सुत (६.३) | of the sons of Vinata (Garudas) |
| महाध्वरे | महत्–अध्वर (७.१) | in a great sacrifice |
| विध्यपचारदोषः | विधि–अपचार–दोष (१.१) | a flaw from procedural error |
| कर्मान्तरेण | कर्मन्–अन्तर (३.१) | by another act |
| इव | इव | as |
| महोदयेन | महत्–उदय (३.१) | of great effect |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | भो | ग | सं | घः | श | म | मु | ग्र | धा | म्नां |
| सै | न्ये | न | नि | न्ये | वि | न | ता | सु | ता | नाम् |
| म | हा | ध्व | रे | वि | ध्य | प | चा | र | दो | षः |
| क | र्मा | न्त | रे | णे | व | म | हो | द | ये | न |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.