अन्वयः
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पशूनाम् पतिः तम् चक्षुःश्रवसाम् समूहम्, नेता नयेन पर-उपजापम् इव, तार्क्ष्य-उदय-कारणेन मन्त्रेण आशु निवारयामास।
English Summary
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The Lord of Beings (Shiva), with a mantra that caused the appearance of Garuda, quickly repelled that host of serpents, just as a leader quells sedition among his enemies through statecraft.
सारांश
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पशुपति शिव ने गरुड़ोत्पत्ति के मन्त्र द्वारा सर्पों के उस समूह को शीघ्र ही वैसे ही शांत कर दिया, जैसे कोई नीतिवान नेता अपनी कूटनीति से शत्रुओं के षड्यंत्र को विफल कर देता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
तमिति ॥ पशूनां पतिः शिवस्तं चक्षुःश्रवसां सर्पाणां समूहं तार्क्ष्योदयकारणेन गरुडाविर्भावहेतुना मन्त्रेण नेता नायको नयेन नीत्या परेषामुपजापं परोपर्जापं पर:कृतं स्वमण्डलभेदमिव ।
भेदोपजापावुपधा इत्यमरः (अमरकोशः २.८.२१ ) । आशु निवारयामास ॥
पदच्छेदः
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| तम् | तद् (२.१) | that |
| आशु | आशु | quickly |
| चक्षुःश्रवसाम् | चक्षुस्–श्रवस् (६.३) | of the serpents (ear-eyed) |
| समूहम् | समूह (२.१) | host |
| मन्त्रेण | मन्त्र (३.१) | by a mantra |
| तार्क्ष्योदयकारणेन | तार्क्ष्य–उदय–कारण (३.१) | which was the cause of Garuda's appearance |
| नेता | नेतृ (१.१) | a leader |
| नयेन | नय (३.१) | by statecraft |
| इव | इव | like |
| परोपजापम् | पर–उपजाप (२.१) | sedition among enemies |
| निवारयामास | निवारयामास (नि√वृ +णिच्+आम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | repelled |
| पतिः | पति (१.१) | the Lord |
| पशूनाम् | पशु (६.३) | of beings |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | मा | शु | च | क्षुः | श्र | व | सां | स | मू | हं |
| म | न्त्रे | ण | ता | र्क्ष्यो | द | य | का | र | णे | न |
| ने | ता | न | ये | ने | व | प | रो | प | जा | पं |
| नि | वा | र | या | मा | स | प | तिः | प | शू | नाम् |
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