अन्वयः
AI
इह, जलधेः अम्भः इव, समुल्लसत्प्रासमहोर्मिमालम्, परिस्फुरच्चामरफेनपङ्क्ति, विभिन्नमर्यादम् अश्वीयम् आशाः न आतनोति ।
English Summary
AI
Here, the cavalry does not fill the directions like the water of the ocean breaking its bounds, with gleaming spears for waves and waving chowries for rows of foam. (Arjuna notes the absence of a cavalry division).
सारांश
AI
घुड़सवार सेना समुद्र के जल की भाँति दिशाओं में फैल रही है। चमकते हुए भाले लहरों के समान हैं और हिलते हुए चँवर जल के फेन की पंक्तियों की तरह शोभा पा रहे हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
समुल्लसदिति॥इह युद्धे प्रासाः कुन्ताः।
प्रासस्तु कुन्तःइत्यमरः (अमरकोशः २.८.९३ ) । ते महोर्मय इव तेषां मालाः समुल्लसन्त्यो यत्र तत्समुल्लसत्प्रासमहोर्मिमालम् । चामराणि फेना इव चामरफेनास्तेषां पङ्क्तयः परिस्फुरन्त्यश्चामरफेनपङ्क्तयो यत्र तत्तथोक्तम् । अश्वीयमश्वसमूहः । वृन्दे त्वश्वीयमाश्ववत् इत्यमरः (अमरकोशः २.८.४८ ) । जलधेरम्भ इव विभिन्नमर्यादमुच्छृङ्खलं यथा तथाशा दिशो नातनोति नावृणोति ॥ हताहतेत्युद्धतभीमघोषैः समुज्झिता योद्धृभिरभ्यमित्रम् । न हेतयः प्राप्ततडित्त्विषः खे विवस्वदंशुज्वलिताः पतन्ति
पदच्छेदः
AI
| समुल्लसत्प्रासमहोर्मिमालम् | समुल्लसत्–प्रास–महा–ऊर्मि–माल (२.१) | which has a series of great waves in the form of gleaming spears |
| परिस्फुरच्चामरफेनपङ्क्ति | परिस्फुरत्–चामर–फेन–पङ्क्ति (२.१) | which has rows of foam in the form of waving chowries |
| विभिन्नमर्यादम् | विभिन्न–मर्याद (२.१) | which has broken its boundaries |
| इह | इह | here |
| आतनोति | आतनोति (आ√तन् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spreads over / fills |
| न | न | not |
| अश्वीयम् | अश्वीय (१.१) | the cavalry |
| आशाः | आशा (२.३) | the directions |
| जलधेः | जलधि (६.१) | of the ocean |
| इव | इव | like |
| अम्भः | अम्भस् (१.१) | water |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | मु | ल्ल | स | त्प्रा | स | म | हो | र्मि | मा | लं |
| प | रि | स्फु | र | च्चा | म | र | फे | न | प | ङ्क्ति |
| वि | भि | न्न | म | र्या | द | मि | हा | त | नो | ति |
| ना | श्वी | य | मा | शा | ज | ल | धे | रि | वा | म्भः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.