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विचित्रया चित्रयतेव भिन्नां
रुचं रवेः केतनरत्नभासा ।
महारथौघेन न संनिरुद्धाः
पयोदमन्द्रध्वनिना धरित्री ॥

अन्वयः AI विचित्रया केतनरत्नभासा रवेः रुचम् भिन्नाम् चित्रयता इव, पयोदमन्द्रध्वनिना महारथौघेन धरित्री न संनिरुद्धा ।
English Summary AI The earth is not blocked by a multitude of great chariots, which have a deep rumble like clouds and whose banners, with the lustre of their gems, seem to paint the sun's light with varied colors. (Arjuna notes the absence of a chariot division).
सारांश AI रथों के विशाल समूह ने पृथ्वी को घेर लिया है। ध्वजाओं के रत्नों की चमक सूर्य की किरणों को विविध रंगों में बदल रही है और रथों की गड़गड़ाहट बादलों के गंभीर गर्जन जैसी सुनाई दे रही है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) तेज इति ॥ पुनश्च । परैररिभिरहार्यमभेद्यं निजं स्वकीयं महत्तेजो वीर्यं मित्रमिव समाश्रित्य । अतएव भीमे भयानकेऽरिरेव दुर्गं तस्मिन्नरिदुर्गे शत्रुसंकटेऽस्खलितस्वभावमचलशीलमुरु महद्धैर्यं भुजालम्बमिव हस्तावष्टम्भमिवासादयन्प्राप्नुवन् । ईदृशे संकटेऽपि महावीरत्वाद्धैर्यमत्यजन्नित्यर्थः ॥ वंशोचितत्वादभिमानवत्या संप्राप्तया सं प्रियतामसुभ्यः । समक्षमादित्सितया परेण वध्वेव कीर्त्या परितप्यमानः
पदच्छेदः AI
विचित्रयाविचित्र (३.१) with variegated
चित्रयताचित्रयत् (√चित्र+क्यच्+शतृ, ३.१) as if painting
इवइव as if
भिन्नाम्भिन्न (√भिद्+क्त, २.१) split/variegated
रुचम्रुच् (२.१) the light/splendor
रवेःरवि (६.१) of the sun
केतनरत्नभासाकेतनरत्नभास् (३.१) with the lustre of the gems on the banners
महारथौघेनमहारथओघ (३.१) by the multitude of great chariots
not
संनिरुद्धासंनिरुद्ध (सम्+नि√रुध्+क्त, १.१) blocked
पयोदमन्द्रध्वनिनापयोदमन्द्रध्वनि (३.१) with a deep sound like that of clouds
धरित्रीधरित्री (१.१) the earth
छन्दः उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
वि चि त्र या चि त्र ते भि न्नां
रु चं वेः के त्न भा सा
हा थौ घे सं नि रु द्धाः
यो न्द्र ध्व नि ना रि त्री
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