त्विषां ततिः पाटलिताम्बुवाहा
सा सर्वतः पूर्वसरीव संध्या ।
निनाय तेषां द्रुतमुल्लसन्ती
विनिद्रतां लोचनपङ्कजानि ॥
त्विषां ततिः पाटलिताम्बुवाहा
सा सर्वतः पूर्वसरीव संध्या ।
निनाय तेषां द्रुतमुल्लसन्ती
विनिद्रतां लोचनपङ्कजानि ॥
सा सर्वतः पूर्वसरीव संध्या ।
निनाय तेषां द्रुतमुल्लसन्ती
विनिद्रतां लोचनपङ्कजानि ॥
अन्वयः
AI
सर्वतः पूर्वसरी संध्या इव, पाटलित-अम्बुवाहा सा त्विषां ततिः उल्लसन्ती सती, तेषां लोचनपङ्कजानि द्रुतं विनिद्रतां निनाय।
English Summary
AI
That expanse of splendors, which made the clouds pink and shone brightly from all sides like the preceding twilight, quickly led their lotus-like eyes to a state of wakefulness.
सारांश
AI
बादलों को लाल करती हुई वह कांति प्रभात की संध्या के समान उदित हुई और उसने शीघ्र ही उन किरातों के नेत्र-कमलों को निद्रा से जगा दिया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
त्विषामिति ॥ सर्वतः पाटलिताः पाटलीकृता अम्बुवाहा यया सा तथोक्ता त्विषां तेजसां ततिः।पूर्वां सरतीति पूर्वसरी।
पूर्वे कर्तरि (अष्टाध्यायी ३.२.१९ ) इति टप्रत्यये ङीप्।सर्वनाम्नो वृत्तिमात्रे पुंवद्भावः इति पूर्वाशब्दस्य पुंवद्भावः । संध्या प्रातःसंध्येवोल्लसन्ती प्रसरन्ती तेषां गणानां लोचनपङ्कजानि द्रुतं विनिद्रतां विकासं निनाय ॥
पदच्छेदः
AI
| त्विषाम् | त्विष् (६.३) | of splendors |
| ततिः | तति (१.१) | the expanse |
| पाटलित | पाटलित | made pink |
| अम्बुवाहा | अम्बुवाह (१.१) | the clouds |
| सा | तद् (१.१) | That |
| सर्वतः | सर्वतस् | from all sides |
| पूर्वसरी | पूर्वसर (१.१) | preceding |
| इव | इव | like |
| संध्या | संध्या (१.१) | twilight |
| निनाय | निनाय (√नी कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | led |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| द्रुतम् | द्रुत (२.१) | quickly |
| उल्लसन्ती | उल्लसन्ती (उत्√लस्+शतृ, १.१) | shining brightly |
| विनिद्रताम् | विनिद्रता (२.१) | to wakefulness |
| लोचनपङ्कजानि | लोचनपङ्कज (२.३) | lotus-like eyes |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्वि | षां | त | तिः | पा | ट | लि | ता | म्बु | वा | हा |
| सा | स | र्व | तः | पू | र्व | स | री | व | सं | ध्या |
| नि | ना | य | ते | षां | द्रु | त | मु | ल्ल | स | न्ती |
| वि | नि | द्र | तां | लो | च | न | प | ङ्क | जा | नि |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.