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कृतान्तदुर्वृत्त इवापरेषां
पुरः प्रतिद्वन्द्विनि पाण्डवास्त्रे ।
अतर्कितं पाणितलान्निपेतुः
क्रियाफलानीव तदायुधानि ॥

अन्वयः AI प्रतिद्वन्द्विनि पाण्डवास्त्रे पुरः स्थिते सति, कृतान्तदुर्वृत्ते इव, अपरेषां तदायुधानि क्रियाफलानि इव अतर्कितं पाणितलात् निपेतुः।
English Summary AI With Arjuna's weapon opposing them, as if fate itself were acting perversely, the weapons of the other Ganas fell unexpectedly from their hands, like the fruits of actions being lost before they can be enjoyed.
सारांश AI पाण्डुपुत्र के अस्त्र के सामने अन्य किरातों के हाथों से अस्त्र अचानक वैसे ही गिर पड़े जैसे दुर्भाग्य आने पर कर्मों के फल नष्ट हो जाते हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) कृतान्तेति ॥ कृतान्तदुर्वृत्ते दैवदुश्चेष्टित इव । कृतान्तो यमसिद्धान्तदैवाकुशलकर्मसु इति विश्वः । पाण्डवास्त्रे पुरः प्रतिद्वन्द्विनि प्रतिकुलवर्तिनि सति तदा तस्मिन्कालेऽपरेषामायुधानि क्रियाफलानि कृष्यादिफलानीव । अतर्कितमविचारितमेव पाणितलान्निपेतुः॥
पदच्छेदः AI
कृतान्तदुर्वृत्तेकृतान्तदुर्वृत्त (७.१) when fate is acting perversely
इवइव as if
अपरेषाम्अपर (६.३) of the others
पुरःपुरस् in front
प्रतिद्वन्द्विनिप्रतिद्वन्द्विन् (७.१) as an opponent
पाण्डवास्त्रेपाण्डवास्त्र (७.१) Arjuna's weapon
अतर्कितम्अतर्कित (२.१) unexpectedly
पाणितलात्पाणितल (५.१) from their palms
निपेतुःनिपेतुः (नि√पत् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) fell
क्रियाफलानिक्रियाफल (१.३) the fruits of actions
इवइव like
तदायुधानितदायुध (१.३) their weapons
छन्दः उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
कृ ता न्त दु र्वृ त्त वा रे षां
पु रः प्र ति द्व न्द्वि नि पा ण्ड वा स्त्रे
र्कि तं पा णि ला न्नि पे तुः
क्रि या ला नी दा यु धा नि
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