गुरुस्थिराण्युत्तमवंशजत्वा-
द्विज्ञातसाराण्यनुशीलनेन ।
केचित्समाश्रित्य गुणान्वितानि
सुहृत्कुलानीव धनूंषि तस्थुः ॥

अन्वयः AI केचित् उत्तमवंशजत्वात् गुरुस्थिराणि, अनुशीलनेन विज्ञातसाराणि, गुणान्वितानि धनूंषि, सुहृत्कुलानि इव, समाश्रित्य तस्थुः।
English Summary AI Some of the Ganas, before succumbing to sleep, stood leaning on their bows—which were heavy and firm from being made of excellent bamboo, their strength known through practice, and endowed with strings—as if leaning on families of good friends endowed with virtues.
सारांश AI कुछ किरात अपने उत्तम वंश के कारण सुदृढ़ और परीक्षित गुणों वाले धनुषों का सहारा लेकर वैसे ही खड़े रहे जैसे कोई सज्जन मित्रों का सहारा लेता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) गुर्वीति॥ केचिदुत्तमवंशजत्वाद्वंशो वेणुः कुलं च।वंशो वेणौ कुले च इति विश्वः। गुरूणि महान्ति स्थिराणि दृढानि च गुरुस्थिराण्यनुशीलनेन परिचयबलेन विज्ञातः सारो बलं येषां तानि गुणैर्मौर्वीभिः शौर्यादिभिश्चान्वितानि धनूंषि सुहृत्कुलानि मित्रकुलानीव समाश्रित्य तस्थुः । धनूंष्यवष्टभ्य निदध्युरित्यर्थः॥
पदच्छेदः AI
गुरुस्थिराणिगुरुस्थिर (२.३) heavy and firm
उत्तमवंशजत्वात्उत्तमवंशजत्व (५.१) from being made of excellent bamboo
विज्ञातसाराणिविज्ञातसार (२.३) whose strength was known
अनुशीलनेनअनुशीलन (३.१) through practice
केचित्कश्चित् (१.३) Some
समाश्रित्यसमाश्रित्य (सम्+आ√श्रि+ल्यप्) leaning on
गुणान्वितानिगुणअन्वित (२.३) endowed with strings
सुहृत्कुलानिसुहृत्कुल (२.३) families of friends
इवइव like
धनूंषिधनुस् (२.३) their bows
तस्थुःतस्थुः (√स्था कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) stood
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
गु रु स्थि रा ण्यु त्त वं त्वा
द्वि ज्ञा सा रा ण्य नु शी ने
के चि त्स मा श्रि त्य गु णा न्वि ता नि
सु हृ त्कु ला नी नूं षि स्थुः
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