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प्रसक्तदावानलधूमधूम्रा
निरुन्धती धाम सहस्ररश्मेः ।
महावनानीव महातमिस्रा
छाया ततानेशबलानि काली ॥

अन्वयः AI प्रसक्तदावानलधूमधूम्रा, सहस्ररश्मेः धाम निरुन्धती, महातमिस्रा काली छाया, महावनानि इव, ईशबलानि ततान।
English Summary AI A dark shadow, smoky-hued like the smoke of a raging forest fire and obstructing the sun's light, spread over Shiva's forces, just as a great darkness covers vast forests.
सारांश AI वनाग्नि के धुएँ के समान काली वह महातमिस्रा सूर्य के प्रकाश को रोकती हुई किरात सेना पर घने वन की छाया की तरह छा गई।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) प्रसक्तेति ॥ प्रसक्तः संततो यो दावानलधूमस्तद्वद्धूम्रा धूसरा सहस्ररश्मेर्धाम तेजो निरुन्धत्यावृण्वती काली कृष्णवर्णा । जानपद- (अष्टाध्यायी ४.१.४२ ) इत्यादिना ङीप् । छाया कान्तिः। ईशबलानि महातमिस्रा महती तमःसंततिः। तमिस्रा तु तमस्ततिः इति विश्वः । महावनानीव । ततान व्यानशे ।
पदच्छेदः AI
प्रसक्तप्रसक्त (प्र√सञ्ज्+क्त) of a raging
दावानलदावानल forest fire
धूमधूम of the smoke
धूम्राधूम्र (१.१) smoky-hued
निरुन्धतीनिरुन्धती (नि√रुध्+शतृ, १.१) obstructing
धामधामन् (२.१) the light
सहस्ररश्मेःसहस्ररश्मि (६.१) of the sun
महावनानिमहावन (२.३) vast forests
इवइव like
महातमिस्रामहातमिस्रा (१.१) a great darkness
छायाछाया (१.१) a shadow
ततानततान (√तन् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) spread over
ईशबलानिईशबल (२.३) Shiva's forces
कालीकाली (१.१) dark
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
प्र क्त दा वा धू धू म्रा
नि रु न्ध ती धा स्र श्मेः
हा ना नी हा मि स्रा
छा या ता ने ला नि का ली
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