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परिक्षते वक्षसि दन्तिदन्तैः
प्रियाङ्कशीता नभसः पतन्ती ।
नेह प्रमोहं प्रियसाहसानां
मन्दारमाला विरलीकरोति ॥

अन्वयः AI इह दन्तिदन्तैः वक्षसि परिक्षते (सति), प्रियाङ्कशीता मन्दारमाला नभसः पतन्ती प्रियसाहसानाम् प्रमोहं न विरलीकरोति ।
English Summary AI Here, for heroes who love valorous deeds and are fatally wounded in the chest by elephant tusks, a Mandara garland—falling from heaven and cool like a beloved's embrace—does not descend to dispel their final swoon. (Arjuna notes the absence of the celestial reward for fallen heroes).
सारांश AI हाथियों के दाँतों से घायल हुए पराक्रमी योद्धाओं के वक्षस्थल पर आकाश से मन्दार की मालाएँ गिर रही हैं, जो अपनी दिव्यता और शीतलता से उनकी पीड़ा और मोह को कम कर रही हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) परीति ॥ इह रणे दन्तिदन्तैर्गजदन्तैः परिक्षते ताडिते वक्षसि नमसः पतन्ती प्रियाया अङ्क इव शीता शीतला सुखकरी मन्दारमाला । सुरैर्मुक्तेति शेषः । प्रियं साहसं येषां तेषां प्रियसाहसानाम् । यतो गजाभियायिनामिति भावः। प्रमोहं प्रहारमूर्च्छां न विरलीकरोति न मन्दीकरोति । नापनयतीति, यावत् ॥
पदच्छेदः AI
परिक्षतेपरिक्षत (परि√क्षन्+क्त, ७.१) being deeply wounded
वक्षसिवक्षस् (७.१) on the chest
दन्तिदन्तैःदन्तिन्दन्त (३.३) by the tusks of elephants
प्रियाङ्कशीताप्रियाअङ्कशीत (१.१) cool from the embrace of a beloved
नभसःनभस् (५.१) from the sky
पतन्तीपतत् (√पत्+शतृ, १.१) falling
not
इहइह here
प्रमोहम्प्रमोह (२.१) the swoon (of death)
प्रियसाहसानाम्प्रियसाहस (६.३) of those who love valorous deeds
मन्दारमालामन्दारमाला (१.१) a garland of Mandara flowers
विरलीकरोतिविरलीकरोति (√कृ +च्वि कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) dispels / makes thin
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
रि क्ष ते क्ष सि न्ति न्तैः
प्रि या ङ्क शी ता सः न्ती
ने प्र मो हं प्रि सा सा नां
न्दा मा ला वि ली रो ति
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