अन्वयः
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यतः सः त्रास-जिह्मम् एतान् मन्दम् एव अन्वियाय । हि महा-ओजसः भग्नान् अतिपीडयितुम् न इच्छन्ति ।
English Summary
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Therefore, he followed them slowly as they fled crookedly in fear. For, the truly powerful do not wish to excessively torment the defeated.
सारांश
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भय से कातर होकर भागते हुए उन सैनिकों का अर्जुन ने बहुत मंद गति से पीछा किया, क्योंकि महान तेजस्वी वीर पराजित शत्रुओं को अत्यधिक पीड़ित नहीं करते।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
त्रासेति ॥ सोऽर्जुनस्त्रासजिह्मं भयक्लिष्टं यथा तथा यतो गच्छतः। पलायमानानित्यर्थः । एतान्गणान्मन्दमेवान्वियायानुजगाम । तथा हि । महौजसो महानुभावा भन्नानतिपीडयितुं नेच्छन्ति ॥
पदच्छेदः
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| त्रास-जिह्मम् | त्रास–जिह्म (२.१) | crookedly due to fear |
| यतः | यतस् | therefore |
| च | च | and |
| एतान् | एतद् (२.३) | them |
| मन्दम् | मन्द (२.१) | slowly |
| एव | एव | only |
| अन्वियाय | अन्वियाय (अनु√इ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he followed |
| सः | तद् (१.१) | he |
| न | न | not |
| अतिपीडयितुम् | अतिपीडयितुम् (अति√पीड्+णिच्+तुमुन्) | to torment excessively |
| भग्नान् | भग्न (√भञ्ज्+क्त, २.३) | the defeated ones |
| इच्छन्ति | इच्छन्ति (√इष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | wish |
| हि | हि | for |
| महा-ओजसः | महा–ओजस् (१.३) | the very powerful ones |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्रा | स | जि | ह्मं | य | त | श्चै | ता |
| न्म | न्द | मे | वा | न्वि | या | य | सः |
| ना | ति | पी | ड | यि | तुं | भ | ग्ना |
| नि | च्छ | न्ति | हि | म | हौ | ज | सः |
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