अन्वयः
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तेन भीमाः, भीमार्जनफलाननाः, शिखाधरजवाससः, न न अनुकम्प्याः विशिखाः व्यातेनिरे ।
English Summary
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By him (Shiva), terrible arrows were spread out—arrows whose points and heads had a dreadful impact, which possessed his own speed, and were not to be pitied at all.
सारांश
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शिव के वे भयंकर बाण, जिनके अग्रभाग शत्रुओं के लिए घातक थे और जिनमें मयूर पंख लगे थे, किसी पर भी दया नहीं दिखा रहे थे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
तेनेति ॥ तेन शिवेन भीमा भयंकरास्तथा भियो भयस्य मार्जनं निरासस्तदेव फलं प्रयोजनं येषां तान्याननान्यग्राणि येषां ते भीमार्जनफलाननाः । तथा शिखाधरा मयूरास्तेषु जातानि शिखाधरजानि बर्हाणि तानि वासांसीव वासांसि पक्षा येषां ते शिखाधरजवाससः । मयूरपक्षिण इत्यर्थः । विशिखा बाणा अनुकम्प्य कृपां कृत्वा न व्यांतेनिर इति न । किं त्वनुकम्प्यैवेत्यर्थः । अनुजिघृक्षुत्वादिति भावः । संभाव्यनिषेधने द्वौ प्रतिषेधावित्युक्तम् । शृङ्खलायमकम् ॥
पदच्छेदः
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| तेन | तद् (३.१) | by him (Shiva) |
| व्यातेनिरे | व्यातेनिरे (वि+आ√तन् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | were spread out |
| भीमाः | भीम (१.३) | terrible |
| भीमार्जनफलाननाः | भीम–अर्जन–फल–आनन (१.३) | whose points and heads had a terrible impact |
| न | न | not |
| न | न | not (emphatic) |
| अनुकम्प्याः | अनुकम्प्य (अनु√कम्प्+ण्यत्, १.३) | to be pitied |
| विशिखाः | विशिख (१.३) | arrows |
| शिखाधरजवाससः | शिखाधर–जव–आसस् (१.३) | possessing the speed of Shiva |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | न | व्या | ते | नि | रे | भी | मा |
| भी | मा | र्ज | न | फ | ला | न | नाः |
| न | ना | नु | क | म्प्य | वि | शि | खाः |
| शि | खा | ध | र | ज | वा | स | सः |
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