पार्थबाणाः पशुपतेरावव्रुर्विशिखावलिम् ।
पयोमुच इवारन्ध्राः सावित्रीमंशुसंहतिम् ॥

अन्वयः AI अरन्ध्राः पार्थबाणाः पशुपतेः विशिखावलिम् आवव्रुः, पयोमुचः सावित्रीम् अंशुसंहतिम् इव ।
English Summary AI Arjuna's dense arrows completely covered the stream of Shiva's arrows, just as dense clouds cover the multitude of the sun's rays.
सारांश AI अर्जुन के बाणों ने शिव के बाणों के समूह को उसी प्रकार पूरी तरह ढंक लिया, जैसे घने बादल सूर्य की किरणों को आच्छादित कर लेते हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) पार्थेति ॥ पार्थबाणा अर्जुनशराः पशुपतेर्विशिखावलीं शरसंघातम् । सवितुरियं सावित्री तामंशुसंहतिं किरणसमूहमरन्ध्रा निबिडाः पयोमुचो मेघा इव । आवव्रुस्तिरोदधुः ॥
पदच्छेदः AI
पार्थबाणाःपार्थबाण (१.३) Arjuna's arrows
पशुपतेःपशुपति (६.१) of Pashupati (Shiva)
आवव्रुःआवव्रुः (आ√वृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) covered
विशिखावलिम्विशिखआवलि (२.१) the stream of arrows
पयोमुचःपयोमुच् (१.३) clouds
इवइव like
अरन्ध्राःरन्ध्र (१.३) dense/without gaps
सावित्रीम्सावित्री (२.१) of the sun
अंशुसंहतिम्अंशुसंहति (२.१) the collection of rays
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
पा र्थ बा णाः शु ते
रा व्रु र्वि शि खा लिम्
यो मु वा न्ध्राः
सा वि त्री मं शु सं तिम्
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