अन्वयः
AI
शिक्षा-लाघव-लीलया परिमोहयमाणेन पिनाकिना जैष्णवी विशिख-श्रेणी परिजह्रे ।
English Summary
AI
By the wielder of the Pinaka (Shiva), who was bewildering Arjuna with the effortless grace of his skill and lightness of hand, the stream of arrows from Jishnu's bow was intercepted.
सारांश
AI
अपनी श्रेष्ठ युद्धकला और फुर्ती से विस्मित करते हुए शिव ने अर्जुन द्वारा छोड़े गए बाणों के समूह को निष्फल कर दिया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
परीति ॥ शिक्षालाघवलीलयाभ्यासपाटवातिशयेन हेतुना परिमोहयमाणेन व्यामोहयता।
अणावकर्मकाच्चित्तवत्कर्तृकात् (अष्टाध्यायी १.३.८८ ) इति परस्मैपदेप्राप्ते न पादमि— इत्यादिना तत्प्रतिषेधादात्मनेपदं शानच् । णेर्विभाषा (अष्टाध्यायी ८.४.३० ) इति कृत्स्थस्य नस्य वा णत्वम् । पिनाकिना हरेण जिष्णोरर्जुनस्येयं जैष्णवी विशिखश्रेणी बाणसंघातः परिजह्रे निरस्ता ॥ अवद्यन्पत्रिणः शंभोः सायकैरवसायकैः। पाण्डवः परिचक्राम शिक्षया रणशिक्षया
पदच्छेदः
AI
| परिमोहयमाणेन | परिमोहयमाण (परि√मुह्+णिच्+शानच्, ३.१) | by the one who was bewildering |
| शिक्षालाघवलीलया | शिक्षा–लाघव–लीला (३.१) | with the play of skill and lightness |
| जैष्णवी | जैष्णव (१.१) | belonging to Jishnu (Arjuna) |
| विशिखश्रेणी | विशिख–श्रेणी (१.१) | the stream of arrows |
| परिजह्रे | परिजह्रे (परि√हृ भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was intercepted |
| पिनाकिना | पिनाकिन् (३.१) | by the wielder of Pinaka (Shiva) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | रि | मो | ह | य | मा | णे | न |
| शि | क्षा | ला | घ | व | ली | ल | या |
| जै | ष्ण | वी | वि | शि | ख | श्रे | णी |
| प | रि | ज | ह्रे | पि | ना | कि | ना |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.