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स बभार रणापेतां चमूं पश्चादवस्थिताम् ।
पुरः सूर्यादुपावृत्तां छायामिव महातरुः ॥

अन्वयः AI सः महा-तरुः पुरः सूर्यात् उपावृत्ताम् छायाम् इव, पश्चात् अवस्थिताम् रण-अपेताम् चमूम् बभार ।
English Summary AI He (Shiva) supported the army, which had retreated from battle and was positioned behind him, just as a great tree supports the shade that has moved back from its front due to the sun's movement.
सारांश AI शिव ने युद्ध से विमुख होकर पीछे स्थित सेना को वैसे ही आश्रय दिया जैसे एक विशाल वृक्ष सूर्य की दिशा से हटने वाली छाया को सहारा देता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः) स इति ॥ स शिवोरणापेतां रणादपवृत्तां पराङ्मुखीभूतामत एव पश्चात्पृष्ठभागेऽव स्थितां चमूं पुरोऽग्रे स्थितः सूर्यः पुरःसूर्यः । रणोपमानमेषः। तस्मादपावृत्तां परावृत्तां छायां महातरुरिव बभार । छायां तरुरिवात्मैकशरणां तां चमूं न' मुमोचेत्यर्थः ॥
पदच्छेदः AI
सःतद् (१.१) he
बभारबभार (√भृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) supported
रणापेताम्रणअपेत (अप√इ+क्त, २.१) which had retreated from battle
चमूम्चमू (२.१) the army
पश्चादवस्थिताम्पश्चात्अवस्थित (अव√स्था+क्त, २.१) positioned behind
पुरःपुरस् in front
सूर्यात्सूर्य (५.१) from the sun
उपावृत्ताम्उपावृत्त (उप+आ√वृत्+क्त, २.१) moved back
छायाम्छाया (२.१) the shade
इवइव like
महातरुःमहातरु (१.१) a great tree
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
भा णा पे तां
मूं श्चा स्थि ताम्
पु रः सू र्या दु पा वृ त्तां
छा या मि हा रुः
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